मैं इस समय इसपर कोई टीका नहीं करूंगा। लेकिन मैं इस बातका इन्तजार करूंगा कि अधिकारी इस सम्बन्धमें कोई बयान जारी करें निःसन्देह, यदि इन प्रवासियोंको भारत आनेकी दावत दी जाती है तो विशेष रूपसे उनकी देखभाल करना जरूरी हो जाता है। उनमें से अधिकांशके लिए तो भारत विदेश जैसा बन गया है ।
- [ अंग्रेजीसे ]
- यंग इंडिया, २-५-१९२९
३०३. तार : छगनलाल जोशीको
तुनी
२ मई, १९२९
उद्योग मन्दिर
यदि गोशालावाले कान्तिको छोड़ सकें तो वह राजकोट जा सकता है ।
बापू
- अंग्रजी (एस० एन० १५३९२) की माइक्रोफिल्म से ।
३०४. पत्र : मीराबहनको
तुनी
२ मई, १९२९
इच्छा होते हुए भी मैं तुम्हें इन दिनों पत्र नहीं लिख सका हूँ। मेरे पास जो समय बचता है, उसे मैं बाकी बचे हुए कामको निपटानेमें लगाता हूँ ।
साथमें रोलांके नाम मेरा पत्र है ।[१] इसे अनुवाद करके भेज देना । हाँ, तुम चाहो कि मूलमें मुझे सुधार करना चाहिए तो दूसरी बात है ।
आशा है अब तुम्हें मेरा विस्तृत कार्यक्रम मिल गया होगा और तुम्हें ठीक-ठीक मालूम रहेगा कि इस महीनेकी २८ तारीख तक मैं किस दिन कहाँ रहूँगा मुझे मुजफ्फरपुरसे तुम्हारी तरफसे कुछ-न-कुछ समाचार मिलनेकी उत्सुकतापूर्ण प्रतीक्षा रहेगी ।
- ↑ १ देखिए अगला शीर्षक ।