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३११. पत्र : कुसुम देसाईको
कोकोनाडा
३ मई, १९२९
चि॰ कुसुम,
तेरा पत्र मिल गया है। अब जड़ावबहन स्वस्थ हो गई होंगी। अभीतक तो सफरका कोई बुरा असर दिखाई नहीं पड़ा। और अब तो 'बहुत गई थोड़ी रही।' अन्य समाचार प्रभावतीके पत्र से जान लेना।
बापूके आशीर्वाद
चि॰ कुसुमबहन
उद्योग मन्दिर
साबरमती
उद्योग मन्दिर
साबरमती
गुजराती (जी॰ एन॰ १७८९) की फोटो-नकलसे।
३१२. पत्र : मीराबहनको
४ मई, १९२९
चि॰ मीरा,
तुम्हारा कोई पत्र मिले आज चार दिन हो गये हैं। इस छोटे-से गाँवमें, जहाँसे मैं यह पत्र लिख रहा हूँ, आज मुझे कुछ पानेकी आशा भी नहीं है। अबकी बार की यात्रा अत्यन्त रोचक है। उड़ीसाके गाँव और तमिलनाड तो कुछ भी नहीं थे। यहाँ तो भीतरी प्रदेशका दौरा ही करना है। यदि मुझे खाली समय मिलता तो मैं कुछ सीख सकता था। लेकिन मुझे तो जो-कुछ भी सामने आये उसे ही ग्रहण करके सन्तुष्ट होना होगा। स्वास्थ्य अब भी बहुत अच्छा है।
सस्नेह,
बापू
श्रीमती मीराबाई
मार्फत बाबू राजेन्द्रप्रसाद
डाकखाना जीरादेई
(सारन) बिहार
मार्फत बाबू राजेन्द्रप्रसाद
डाकखाना जीरादेई
(सारन) बिहार
अंग्रेजी (जी॰ एन॰ ९४२६) से; तथा सी॰ डब्ल्यू॰ ५३७० से भी।
सौजन्यः मीराबहन
सौजन्यः मीराबहन