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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/३८४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

चि॰ राधा और रुखीको वायु परिवर्तनके लिए भेजे बिना नहीं चलेगा। मैंने मथुरादासके पास माथेरान भेजनेका विचार किया था। किन्तु अब वहाँ जानेका समय नहीं रहा। इसलिए जमनालालजीको तार किया है।[] वे जो लिखें वैसा करना अथवा कोई दूसरी बात सूझे तो उसके अनुसार करना। बालकृष्णका तो ऐसा हो है।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी॰ एन॰ ५४११) की फोटो-नकलसे।

३१९. हरिद्वारमें खादी

हरिद्वार जैसे धाममें खादीकी नन्ही-सी दूकान खुले और बन्द हो जाये और फिर वेद विशारद एवं आचार्यके पदकी योग्यता रखनेवाले पण्डित देव शर्माके समान सज्जनके प्रयत्नसे खादीकी दूकान खुले, यह बात जितनी सुखद है उतनी ही दुःखद भी है। सुखद इसलिए कि खादी-कार्यकी कद्र करनेवाले लोग एक खास धार्मिक वर्गके हैं, दुःखद इसलिए कि जिसके द्वारा करोड़ों लोगोंकी आर्थिक उन्नति हो सकती है, उस खादीकी खपत हरिद्वार जैसे स्थानमें कोशिश करनेपर ही हो पाती है। विदेशी कपड़ेकी दुकानें तो हरिद्वारमें चाहे जितनी मिल सकेंगी, लेकिन खादीकी दूकानके लिए पण्डितोंका सहारा चाहिए। पण्डित देव शर्माने इस भण्डारके बारेमें एक पत्र हिन्दीमें भेजा है, उसमेंसे थोड़ी बातें नीचे देता हूँ :[]

मैं आशा रखता हूँ कि भण्डारकी वृद्धि होगी और उसे पूरा-पूरा प्रोत्साहन मिलेगा।

[गुजरातीसे]
नवजीवन, ५-५-१९२९

३२०. हमारा कलंक

ठक्कर बापाके 'अन्त्यज सर्वसंग्रह' का दूसरा हिस्सा इस अंकसे छपना शुरू हो रहा है। यह संग्रह मेरे पास कई महीने पहले आ चुका था। किन्तु मुसाफिरीके प्रारम्भमें वह मेरे साथ नहीं था। और फिर जब मेरे पास भेज दिया गया तो प्रवासकी दौड़-धूपके कारण मैं उसे देख नहीं सका। समय ही कहाँ था? इसमें शक नहीं कि आन्ध्र देशकी यात्रा कठिनाइयोंसे भरी हुई है, फिर भी लोग दयालु और मोहमाया रखनेवाले हैं, तथा देशभक्त वेंकटप्पैया बड़ी सतर्कता बरत रहे हैं। दोपहरका जो समय मेरे अवकाशका समझा जाता है, वे उसमें किसीको मेरे पास तक नहीं फटकने देते; इसी कारण मैं इस संग्रहको अब देख पाया हूँ।

  1. तार उपलब्ध नहीं है।
  2. यहाँ नहीं दिया गया है। पत्रमें भण्डारकी समिति, प्रारम्भिक पूँजी और दानसे प्राप्त रकमका विवरण था।