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३२४. पत्र : गंगादेवी सनाढ्यको
मौनवार [६ मई, १९२९ या उससे पूर्व][१]
चि॰ गंगादेवी,
अब तुमारा शरीर कैसा है। सिवाय दूध और फल कुछ भी मत खाओ। परिश्रम कभी उठाना नहिं। मुझे लिखो। तोतारामजीसे भी कहो लिखे।
बापुके आशीर्वाद
जी॰ एन॰ २५३२ की फोटो नकलसे।
३२५. तार : मीराबहनको
[६ मई, १९२९][२]
मीराबाई
भाटपोखर
भाटपोखर
नेल्लोर मत आओ। दौरा बड़ा कष्ट-साध्य है। गर्मी बढ़ती जा रही हैं। ठहरनेकी सुविधाएँ बहुत कम हैं।बम्बईमें मिलो या चाहो तो वहाँ पहले पहुँच जाओ। सस्नेह।
बापू
अंग्रेजी (सी॰ डब्ल्यू॰ ५३७२) से।
सौजन्य : मीराबहन
सौजन्य : मीराबहन