३३७. पत्र : माधवजी वी॰ ठक्करको
८ मई, १९२९
तुम्हारा पत्र मिल गया है। दूध बढ़ानेपर भी भूख जान पड़े तो दो तोले रोटी बढ़ा लेना। वजन बढ़ रहा है इसलिए भूख लगे तो उसकी चिन्ता नहीं करनी है। वजन बढ़ता रहे तो समझना कि ठीक खूराक ले रहे हो। अब तुम्हारी खूराककी मात्रा यहाँसे निश्चित करनेकी जरूरत नहीं है। तुम्हारे मार्गदर्शनके लिए खुराककी अधिकसे-अधिक मात्रा नीचे दे रहा हूँ।
- दूध ३ सेर[१]=१२० तोला
- रोटी १० तोला
- मुनक्का ४ तोला
- नींबू २ (सोडाके साथ)
- सब्जी ५ तोला
- बादाम की गिरी १ तोला
- हापुस आम २
- मक्खन ३ तोला
यह खूराककी ज्यादासे-ज्यादा मात्रा है। तुम्हें आजसे ही इतनी खुराक लेना शुरू नहीं कर देना है। हो सकता है कि इतनी खुराक कभी न ले सको। किन्तु अपने शरीरकी जाँच करके यदि देखो कि मुँहका स्वाद ठीक है, डकारें न आती हों, पाखाना जानेके समय ही हवा निकलती है, किसी और वक्त नहीं, तो तुम धीरे-धीरे ऊपरकी मात्रातक जा सकते हो। अबसे एक-दो बादाम खूब चबा कर खाओ तो कोई हानि नहीं है।
मोहनदासके वन्देमातरम्
गुजराती (जी॰ एन॰ ६७८०) की फोटो-नकलसे।
- ↑ आशय रतलसे है।