निगहबानीके प्रति उदासीन रहनेसे मेरा जीवन और कार्य अधिक सुगम हो गया है। इस उदासीनता और पुलिसके प्रति बराबर दिखाये गये सौजन्यका परिणाम यह हुआ है कि उनमें से कईका हृदय-परिवर्तन हो गया है। लेकिन मेरी उदासीनता एक अलग और मेरे लिए एक निजी चीज है। एक प्रणालीके रूपमें तो पुलिसकी इस निगहबानीके बारेमें यही कहा जा सकता है कि यह एक गर्हित चीज है और किसी भी अच्छी सरकारके लिए अशोभनीय है। कर के दुर्वह भारसे दबे कर-दाताओंके सिर पर यह एक बेकारका बोझ है। कारण, यह याद रखना चाहिए कि इस सामान्य व्ययके लिए आवश्यक सारा पैसा करोड़ों मेहनतकश लोगोंकी जेबोंसे आता है।
यंग इंडिया, १६-५-१९२९
३६३. दक्षिण आफ्रिकामें भारतीय
दक्षिण आफ्रिकामें भारत सरकारके प्रतिनिधिका पद सँभालना निश्चय ही कोई फूलोंकी शय्या नहीं है। दक्षिण आफ्रिकासे आई डाकके एक पत्रसे मुझे मालूम हुआ है कि सर के॰ वी॰ रेड्डीको अनेक पेचीदा समस्याओंसे उलझना पड़ रहा है और उनको दम मारने तककी फुर्सत नहीं है। उनके लिए अबतक सबसे अधिक चिन्ताका विषय जो मैं समझ पाया हूँ, वह ट्रान्सवालमें गोल्ड एरिया नामसे विख्यात क्षेत्रमें व्यापारिक परवानोंसे सम्बन्धित है। ट्रान्सवालमें भारतीय व्यापारियोंका सबसे अधिक जमाव इसी क्षेत्रमें है और उनके लिए ये व्यापारिक परवाने जीवन-मरणके प्रश्न जितने ही महत्त्वपूर्ण हैं। उन्होंने इसी आशा से बड़े-बड़े व्यवसाय खड़े कर लिए हैं कि उनके परवाने हर साल नये बनते ही जायेंगे। क्रूगर-शासनके दिनोंमें किसी भी समय उनका सारा व्यापार एकदम बन्द कर दिये जानेका खतरा पैदा हो गया था। पर वह संकटकी घड़ी टल जानेके बाद उन्होंने सही या गलत यही सोचा था कि वे जबतक ईमानदारीसे व्यापार करते रहेंगे उनके परवानोंका नवीकरण हमेशा हर साल होता ही जायेगा। अवश्य ही मेरा विचार यह था कि १९१४ का समझौता इन सभी व्यापारियों और उनके उत्तराधिकारियों पर लागू होता है। यदि इनको भी निहित अधिकार न माना जाये, तो मेरी समझमें नहीं आता कि ट्रान्सवालमें भारतीयोंके निहित अधिकार और हो ही क्या सकते हैं। पर अब मुझे पता चला है कि नगरपालिकाएँ स्वर्ण-कानूनके एक खण्डकी आड़ लेकर ऐसे परवाने जारी करनेसे इन्कार कर रही हैं। कानूनकी दृष्टिसे शायद स्वर्ण-कानूनके तहत एशियाइयोंके व्यापार करनेपर प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है। लेकिन यह कानून तो क्रूगर-शासनके दौरान भी लागू था। यह समझौता सम्पन्न होनेके समय भी यह कानून मौजूद था। इसलिए श्री के॰ वी॰ रेड्डीको इन व्यापारियोंके लिए संरक्षण प्राप्त करनेमें कोई कठिनाई नहीं पड़नी चाहिए। हबीबुल्ला प्रतिनिधिमण्डल द्वारा सम्भव बनाये गये इस समझौतेमें यह संकल्पना