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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/४५०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

जन्म विकारके कारण होता है। इसलिए मेरे जैसा व्यक्ति प्रजोत्पत्तिको निषिद्ध मानता है। मैं तो सीता आदिके विषयमें जो मान्यता है उसकी बात करता हूँ। सीताको हम ऐतिहासिक स्त्री न मानें। केवल एक आदर्श नारी समझें। ऐतिहासिक राम-सीताको हम नहीं मानते। ऐतिहासिक राम आज मौजूद नहीं हैं। किन्तु जिसके बारेमें हम सम्पूर्ण ईश्वरत्वका विश्वास करते हैं, जो साक्षात् ईश्वर है, वह राम आज मौजूद है। उस रामनामको रटकर हम तरेंगे। गुण-दोषोंवाले राममें किसीको तारनेकी शक्ति नहीं होगी। यह सब समझमें न आया हो तो मेरे साथ चर्चा अवश्य करना। जो कुछ मैंने अबतक पढ़ा है उसमें मुझे सीताके नामसे उच्च आदर्शवाला कोई नाम मिला नहीं, इसीलिए यह नाम मुझे बहुत प्रिय है। फिर बोलनेमें मधुर और छोटा है। दोनों व्यंजन भी हलके हैं। संयुक्ताक्षर एक भी नहीं और अन्तमें 'आ' होनेसे नाममें संगीतकी ध्वनि भी है। किन्तु तुम इसी नामसे बालिकाको बुलाओ, इसका मैं आग्रह नहीं करता। तुम स्वयं कोई नाम ढूँढ़ कर रख लो, इसमें कुछ दोष नहीं है। धार्मिक ग्रन्थोंमें या उपन्यासोंमें से कोई नाम तुम्हारे सोचे हुए गुणोंका सूचक हो तो वह नाम रख दो। मैं तो और खोजबीन करूँगा ही।

छगनलालका दुःखद किस्सा तो तुम्हें मालूम हो ही गया है। उससे उद्योग मन्दिरमें बड़ा तूफान आ गया है। अब जब मैं वहाँ थोड़े दिन बाद पहुँचूँगा तब ज्यादा खबर मालूम होगी। देवदास अभी वहीं है। नीमू वापस बारडोली पहुँच गई है। रामीका मोरवीका पता है : कुँवरजी खेतसीका घर, त्रिभुवन पारेखकी गली, मोरवी।

मेरा स्वास्थ्य अच्छा है। बा भी कुशलपूर्वक है। इमाम साहब कुछ कमजोर तो हैं; पर वैसे ठीक हैं।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी॰ एन॰ ४७४६) की फोटो-नकलसे।

 

३७७. पत्र : गंगाबहन झवेरीको

१९ मई, १९२९

चि॰ गंगाबहन,

तुम्हारा पत्र मिल गया है। तुम ठीक आनन्द ले रही हो; इसे बनाये रखना। चि॰ कुसुमने लिखा है कि तुम दोनों एक-दूसरेके नजदीक आती जा रही हो। मैं यही चाहता हूँ। तुम लोगोंमें जो एक-दूसरेकी जानती हैं एक हृदय हो जायें तभी वे नई अनुभवहीन बहनोंके आनेपर उनकी सेवा कर पायेंगी। वसुमतीको भी यही लिखता रहा हूँ। तुमने और वसुमतीने एक-दूसरेको ठीक पहचान लिया है। तुम्हारा मण्डल बड़ा हो जाये तो बहुत काम हो सकता है। दो ही बहनोंकी आपसमें बने तो उसमें स्वार्थ आ जाना सम्भव है। सबके साथ बने तो उससे सेवावृत्तिकी वृद्धि हो