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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/४५१

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पत्र : छगनलाल जोशीको

सकती है। इसलिए मैं तुमसे यही माँगता हूँ कि तुम सब एक-दूसरेके साथ घुल-मिल जाओ। उसके लिए पहला कदम तो एक-दूसरेको अच्छी तरह जान लेना है।

जब चोर आये तब कोई नहीं डरा, यह बहुत अच्छी बात है। वे आते हैं तो आते रहें। हम जितनी सावधानी रख सकते हैं उतनी रखनेपर भी आते हैं तो आयें। मेरा ख्याल है कि ये लोग हमें शारीरिक हानि पहुँचाने नहीं आते। वे हमें जाननेवाले लोग हैं और हो सकता है हमारा मजाक करने ही आते हों।

डाहीबहन पटेलको क्या हो जाता है?

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी॰ एन॰ ३०९६) की फोटो-नकलसे।

 

३७८. पत्र : छगनलाल जोशीको

१९ मई, १९२९

चि॰ छगनलाल,

तुम्हारा १२ तारीखका पत्र काफी चक्कर काटनेके बाद मिल गया है; यानी १४ तारीखके पत्रके बाद मिला है।

बालकृष्ण मध्यम मार्गको जानता ही नहीं है। किन्तु अन्तमें ठिकाने आ जायेगा। उसकी कठिन शर्तोंका जो पालन कर सकें, वे करें। मैं इस समय इस विषयमें किसी को कुछ नहीं लिखूँगा। वहाँ पहुँचनेपर ही बात करेंगे।

जयकृष्णको[] तो मैंने समझाया था। तो भी उसने व्रतका संकल्प कर ही लिया। उसे जबरदस्ती कैसे रोकता? अच्छा काम करनेके इच्छुकको तो प्रोत्साहन देना ही चाहिए। वह प्रयत्न करते हुए असफल भी हो जाये तो इससे क्या होता है?

योग्यताकी क्या पहचान है? छगनलालसे बढ़कर अच्छा पात्र हम कहाँसे लायें? हमारा इतिहास यही बताता है कि योग्य व्यक्तिका ही पतन होता है। इसमें आश्चर्य और दुःख करनेकी बात नहीं है। अधिकार आदिके उपयोगकी भी मर्यादा है। जिन्हें हम योग्य नहीं मानते, पर जो समय आनेपर योग्य सिद्ध हुए, ऐसे व्यक्तियोंके मेरे पास अनगिनत उदाहरण हैं। हम जितने सावधान रह सकें, उतने सावधान रहते हुए आगे बढ़नेका प्रयत्न करें। इस संसारमें जोखिम उठाये बिना कुछ काम नहीं हो सकता। मोक्ष प्राप्त करनेके पुरुषार्थमें कोई भी जोखिम उठाना पड़े, उठानेसे न डरें।

बापूके आशीर्वाद

[पुनश्च :]

इस पत्रको पूरा करते ही मीराबहनका पत्र हाथमें आया। उससे भी अधिकारीका निर्णय करनेके बारेमें प्रकाश पड़ता है। जिसे हम पागल समझते हैं वह व्यक्ति

  1. भणसाली; मूलमें जयकरन है, जो कि स्पष्ट भूल है।