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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/४६७

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'गोरक्षा कल्पतरु'

करना है। कांग्रेसने विदेशी वस्त्रोंका बहिष्कार, खादीका उत्पादन और मद्य-निषेधका संगठन करनेवाली तीन समितियाँ नियुक्त की हैं। समितिके सामने इस समय जो प्रस्ताव है वह कांग्रेसके अन्दरूनी संगठनसे सम्बन्धित है। यदि कांग्रेस एक ऐसी अदमनीय शक्ति बनना चाहती है, जिसकी बात या जिसके आदेशका सभी लोग सम्मान करें, तो उसे अपने आपको एक ऐसा शक्तिशाली संगठन बनाना पड़ेगा जिसके सभी भागोंमें परस्पर पूर्ण सामंजस्य हो। आजकल उसमें ऐसा सामंजस्य नहीं है।

यह प्रस्ताव आपको काफी उग्र लग सकता है। लेकिन हमारे सामने जो विषम परिस्थिति आ खड़ी हुई है उसका मुकाबला करनेके लिए हमें उग्र किस्मके उपाय ही करने पड़ेंगे। सच तो यह है कि कार्य-समिति तो इससे भी एक अधिक उम्र रूपमें इस प्रस्तावको स्वीकार करनेके लिए तैयार हो गई थी, अर्थात् यह स्वीकार करनेको तैयार थी कि प्रान्तीय समितियाँ खत्म कर दी जायें और जिला समितियाँ केन्द्रीय समितिके साथ सीधा सम्बन्ध स्थापित करें। लेकिन उसके लिए संविधानमें संशोधन करना आवश्यक हो गया था, और तभी इसकी कठिनाइयोंको महसूस किया गया। पण्डित जवाहरलालकी भी यही राय थी कि समितिको बादमें पछताना पड़ सकता है, लेकिन उनके दिमागमें संशय नहीं था। प्रस्तावमें उग्र किस्मके सुझाव रखे गये। कार्य-समिति यदि समझती है कि देशकी परिस्थिति ऐसे उग्र साधनोंकी अपेक्षा रखती है तो उसे कांग्रेसका दायित्व अपने ऊपर लेना चाहिए। यदि इस प्रस्ताव पर पूरी तौर पर अमल हुआ तो फिर वाइसराय विधान-मण्डलका और विस्तार करके देशका अपमान नहीं कर सकेंगे, और न वह विधान सभामें अध्यक्षका अपमान करनेका साहस करेंगे।[]

[अंग्रेजीसे]
बॉम्बे क्रॉनिकल, २७-५-१९२९
 

३९३. 'गोरक्षा कल्पतरु'

धूलियाके श्री रामेश्वरदासने अपने चाचाकी लड़कीके स्वर्गवासके निमित्त २५ रु॰ इस विचारसे भेजे हैं कि उक्त पुस्तक योग्य व्यक्तियों और संस्थाओंके पास मात्र डाक-खर्च लेकर भेज दी जाये। इस रकमकी समाप्ति तक सिर्फ डाक-खर्चके लिए सवा आनेके टिकट और अपना पूरा-पूरा पता लिख भेजने पर गोशालाके संचालकों और दूसरे गोसेवकोंके पास यह भेज दी जायेगी। इस सम्बन्धमें पत्र-व्यवहारका पता है, मन्त्री, गोसेवा संघ, उद्योग-मन्दिर, साबरमती।

  1. प्रस्तावका समर्थन श्रीनिवास अय्यंगारने किया था। बादमें प्रस्ताव संशोधनोंके साथ पास हो गया।