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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/४९

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१६. पत्र : डी॰ को

सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२१ फरवरी, १९२९

प्रिय मित्र,

आपके दो पत्र मिले। दिल्लीमें आपका पत्र मिलनेसे पहले पण्डित मालवीयजीसे मेरी बातचीत हो चुकी थी। मैंने आपको लिखे अपने पत्रका सार उन्हें बताया, और उन्होंने कहा कि मैंने आपको बिल्कुल ठीक लिखा है कि मालवीयजी शारीरिक दौर्बल्यके कारण आपको कभी अस्वीकार नहीं कर सकते थे। कुछ भी हो, उन्होंने आपको एक बहुत अच्छा प्रमाणपत्र दिया और कहा कि अगर मैं आपका काम कर सकूँ तो उन्हें बड़ी प्रसन्नता होगी, क्योंकि आपको तुरन्त अपने यहाँ लगाना उनके लिए मुश्किल है। वह सहमत हैं कि आपको अविलम्ब सहायता प्राप्त होनी चाहिए। इस बातचीतके समय संयोगवश श्रीयुत घनश्यामदास बिड़ला भी मौजूद थे। इस बातचीतमें और आपमें उनकी भी दिलचस्पी हो गई और उन्होंने आपको तुरन्त अपने पिलानीके कालेज या हाईस्कूलमें, ठीक याद नहीं है, रख लेनेका प्रस्ताव किया। वहाँके लिए उन्हें एक अच्छे प्रोफेसरकी जरूरत है और वहाँ जो वेतन आप चाहते हैं वह मिलनेमें कोई दिक्कत भी नहीं होनी चाहिए। यदि यह पद आपको मंजूर हो तो आप श्रीयुत घनश्यामदास बिड़लाको लिख दें और उनसे मुलाकात तय करके वहाँ चले जायें। उनका पता है : बिड़ला ब्रदर्स, सब्जी मंडी, दिल्ली।

आप क्या कर रहे हैं, कृपया इससे मुझे अवगत कराइएगा। मैं इस पत्रकी और आपके दूसरे पत्रकी भी एक प्रति श्रीयुत घनश्यामदास बिड़लाके पास भेज रहा हूँ। मैं मार्चकी पहली तारीखको साबरमतीसे बर्माके लिए रवाना हो रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि इससे पहले ही आपको कामपर लगा देख लूँ।

हृदयसे आपका,

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३२९८) की माइक्रोफिल्मसे।