१८. पत्र : जयरामदास दौलतरामको
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
२१ फरवरी, १९२९
तुम्हें मुझसे इस पत्रकी बहुत कम आशा थी, पर मैं भेज रहा हूँ। मैंने विदेशी वस्त्र-बहिष्कार समितिका कार्यभार सँभाल लिया है। इसको चलानेके लिए मुझे पूरे समयके लिए एक मन्त्री जरूर चाहिए। और मेरे खयालमें इस कामके लिए तुमसे ज्यादा उपयुक्त और कोई नहीं होगा। इसलिए अगर तुम यह न समझो कि देशहितके लिए कौंसिलमें तुम्हारा होना आवश्यक है, तो मैं चाहूँगा कि तुम एकदम त्याग-पत्र दे दो और मन्त्री-पदका काम सँभाल लो। सालके अन्तमें इस कामसे निवृत्त होनेके लिए तुम कह सकते हो, हालाँकि मैं तो चाहूँगा कि तुम उस समयतक रहो जबतक मुझे तुम्हारी जरूरत है। कौंसिलमें ९ महीनेकी तुम्हारी अनुपस्थितिसे कोई अधिक हर्ज नहीं होनेवाला है, और कौंसिलके दृष्टिकोणसे देखा जाये तो संभवतः यह तुम्हारे लिए अच्छा ही है। मैं तुमसे बहस नहीं करना चाहता और न इसकी जरूरत है। और न इसके लिए [मुझे] फुर्सत ही है। इस पत्रको पढ़नेसे जितना दबाव तुम महसूस कर सकते हो करो, पर ऐसा करनेके बाद जो निर्णय तुम लो वह स्वच्छन्द रूपसे लो। मैं बिना किसी शिकायतके उसे स्वीकार कर लूँगा, भले ही वह प्रतिकूल हो। अगर मेरे प्रस्तावके पक्षमें तुम्हारा झुकाव हो, और सम्भव हो तो पत्रके जवाबमें तुम स्वयं साबरमती आ जाओ। पहली मार्चको मुझे बर्माके लिए जरूर रवाना हो जाना चाहिए——ज्यादासे ज्यादा २ तारीखतक——और मैं बम्बई होते हुए नहीं जाऊँगा।
मलकानी कल मारवाड़ जंक्शनपर मेरे साथ शामिल हो गया है।
तुम्हारे तारकी अपेक्षा करता हूँ।
हृदयसे तुम्हारा,
बम्बई
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५३४९) की फोटो-नकलसे।