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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/८३

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४८. तत्काल सहायता की आवश्यकता

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी बड़े व्यस्त आदमी हैं। वह आजकल हिन्दी-प्रचारके सिलसिले में सेठ जमनालालजी के साथ सारे दक्षिण भारतका दौरा कर रहे हैं। इसी कारण उन्होंने मुझे पत्र न भेजकर, जो कि यदि वह दौरा न कर रहे होते तो आसानीसे भेज सकते थे, निम्नलिखित तार भेजा है:[]

पिछले अक्टूबर और दिसम्बर में 'यंग इंडिया' में छपी अपीलोंके जवाबमें पुडुपालयम गांधी आश्रमको अबतक ७६९ रुपये प्राप्त हुए। इनमें से २२५ रुपये हमें सीधे मिले और ५४४ रुपये साबरमती आश्रमकी मार्फत। ... हमने आश्रम के इर्द-गिर्द एक मीलतक बसे पाँच गाँवोंके आदि द्रविड़ निवासियोंतक ही अपना सहायता कार्य सीमित रखा है। ... प्रत्येक परिवारको एक कार्ड दिया गया है जिससे रियायती मूल्यपर हर शनिवारको आश्रमसे प्रति वयस्क ५ माप और १२ वर्षसे कम प्रत्येक बच्चे के लिए २१/२ मापतक ज्वार प्राप्त की जा सकती है। ... अभीतक १०८ परिवारोंका पंजीकरण किया गया है जिनमें कुल ३४४ वयस्क और १७९ बच्चे हैं। ये लोग २ फरवरी, १९२९ से ऊपर बताई गई सहायता प्राप्त कर रहे हैं। ... तब भी सहायता कार्यपर १,३१२ रुपये खर्च आयेगा जिसमें से हमने केवल ७६९ रुपये प्राप्त किये हैं। किन्तु आश्रमके निकट अन्य गाँव भी हैं जहाँके आदि द्रविड़ निवासी बड़ी दयनीय अवस्थामें हैं और सहायता पानेके लिए शोर मचा रहे हैं। ... इनमें से बहुत से लोग गाँव छोड़कर जा रहे हैं। लेकिन जो बहुत गरीब हैं या बूढ़े हैं, विशेष रूपसे औरतें और बच्चे, वे इस असहनीय स्थिति से बचने के लिए गाँव छोड़कर जानेका रास्ता भी नहीं अपना सकते। ... हम बहुत चाहते हैं कि उन्हें मुफ्त खाना दे सकें। लेकिन हमारे पास सीमित कोष है। ... किसी हदतक सन्तोषजनक काम करनेके लिए हमें कमसे कम और ५ हजार रुपये की आवश्यकता है। सहायता तत्काल चाहिए।

इस तारमें अपनी तरफसे और कुछ कहने की कोई जरूरत नहीं। लेकिन लैटिन की एक कहावत है "जो समयपर सहायता देता है उसका महत्त्व बादमें मिली सहायतासे दूना होता है।" यह एक ऐसा अवसर है जहाँ यह कहावत पूरी तरह लागू होती है। सहायता भेजनेवाले लोग जब-तब छोटी-छोटी रकमें भेजते रहे हैं जिनके लिए राजगोपालाचारी और मैं आभारी हैं। लेकिन इस बीच अकाल पीड़ित लोग भुखमरीके शिकार बनते जा रहे हैं। और किसी भी दिन ऐसा हो सकता है कि बजाय यह कहनेके कि लोग भूखे रह रहे हैं, राजगोपालाचारीको यह सूचना देनी पड़े कि लोग भोजनके अभाव में मर रहे हैं और उस समय यदि सहायता दी भी

  1. यहाँ केवल कुछ अंश ही दिये गये हैं ।