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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/८७

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५६. भाषण : तिलक प्रतिमाके अनावरण
समारोहपर, अहमदाबाद में

२८ फरवरी, १९२९

यह तो निर्विवाद है कि वल्लभभाईके नगरपालिकामें प्रवेश करनेके बाद उसमें हिम्मत भी दिखाई देने लगी है। नगरपालिकाने लोकमान्यकी प्रतिमा[] प्रस्थापित करनेका जो साहस दिखाया है उसके लिए मैं उसे धन्यवाद देता हूँ। कुछ ही वर्ष पूर्व यदि कोई ऐसा काम करता तो यह धृष्टता मानी जाती। पहले तो किसी पुस्तकालयतक में लोकमान्यका चित्र होता था तो सरकार या तो उसे चित्र हटानेके लिए विवश करती थी या उसे मदद देना बन्द कर देती थी। लेकिन अब समय बदल गया है; और यह खुशीकी बात है।

स्वर्गीय लोकमान्य तिलक महाराजने स्वराज्यके लिए अपनी समस्त शक्ति समर्पित कर दी थी। उनकी प्रतिमाकी प्रतिष्ठा तो वही कर सकता है जो स्वराज्यके लिए प्राण बलिदान करने को तैयार हो और जिसमें हमें थोड़े समयके भीतर स्वराज्य दिलानेकी सामर्थ्य हो। आज मेरे साथ आप सब लोग इस समारोह में शामिल हुए हैं तो आप सबका भी यही कर्त्तव्य है कि जिस स्वराज्यको पानेके लिए लोकमान्यने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, उसी स्वराज्यको प्राप्त करनेकी तैयारी करें। कांग्रेसका भी यही आदेश है, इसलिए यह तैयारी करना हरएकका कर्त्तव्य है।

इस समय यद्यपि हिन्दुस्तानका आकाश स्वच्छ है किन्तु उसमें कब बादल घिर आयेंगे, यह नहीं कहा जा सकता। इस प्रतिमाका अनावरण करनेमें और राष्ट्रीय झण्डेको फहराने में नगरपालिकाने जैसी हिम्मत दिखाई है वैसी कठिन समय आ जाने पर भी दिखानी चाहिए। पहले तो स्वराज्यका नाम लेना राजद्रोह माना जाता था। ऐसे कठिन समय में भी लोकमान्यने स्वराज्य और स्वदेशीका जो मन्त्र फूँका, हमें पहले उसे अपने मस्तिष्क में और फिर अपने हृदयमें भी स्थान देना चाहिए और उसके लिए हमें अपने प्राण देनेके लिए भी तैयार रहना चाहिए।

लोकमान्यका दूसरा बड़ा गुण उनकी सादगी थी। वे लाखों रुपये चन्देमें जमा कर सकते थे तब भी उन्हें अपने खान-पान और वस्त्रोंमें बहुत ही अधिक सादगी और किफायत पसन्द थी। इंग्लैंड और अमेरिका जैसे मालदार देशोंके मुकाबले में हमारा देश बहुत गरीब है। हमारे देशमें लोगोंकी दैनिक आमदनी सिर्फ सात पैसे है। और इसमें से यदि सेठ लालभाई और सेठ अम्बालाल जैसे करोड़पति एक ओर कर दे तो सामान्य मनुष्यकी स्थिति कितनी बुरी है, यह तुरन्त समझमें आ जाता

  1. प्रतिमा देशके ही कलाकार श्री कोल्हटकर द्वारा निर्मित कराये जानके लिए भी गांधीजीने नगरपालिकाको धन्यवाद दिया था।