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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/९०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

प्राप्त नहीं हो सकता, तब तो इस झण्डेको फहराना ठीक है। चरखेमें जो संकल्प निहित है वही हम सबके मनमें होना चाहिए। अध्यक्ष और सब लोगोंके मनमें भी वही होना चाहिए। भविष्य में प्रतिकूल अवसर आनेपर यदि आपसे यह झण्डा उतारनेको कहा जाये तो आप उसे उतारेंगे या नहीं? हिन्दुस्तानकी कई नगरपालिकाओंने यह झण्डा फहराया और फिर उतारा भी। और इसीलिए मैं आपको चेतावनी देता हूँ कि एक बार झण्डा फहरानेके बाद उसे उतारना नहीं है और इसके लिए सिर्फ नगरपालिकाके सभासदोंको ही नहीं, किन्तु मत देनेके अधिकारी हरएक नागरिकको जान लड़ा देनी है। इस कामको सम्पन्न करनेसे हमारी शक्ति बढ़ी है। मैं ईश्वरसे यही प्रार्थना करता हूँ कि यह झण्डा आप सबको प्रेरणा दे।

[गुजरातीसे]
प्रजाबन्धु, ३-३-१९२९
 

५९. तार : प्राणजीवन मेहताको

[फरवरी, १९२९][]

मणिलालको उसके स्वास्थ्यकी मौजूदा हालतमें ऐसा करनेके लिए विवश करना जो उसके बिना हो सकता है क्रूरता है।[]

गांधी

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५१३९ ए॰) की फोटो-नकलसे ।
 

६०. पत्र : जगन्नाथको

सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
[१ मार्च, १९२९ से पूर्व][]

प्रिय जगन्नाथजी,

शिकारपुर और सक्खरसे लिखे आपके दोनों पत्र मुझे मिले। शिकारपुरवाले पत्रके साथ मुझे १,७०० रुपयेकी हुंडी भी मिली जिसे मैंने कोषाध्यक्षके पास कलकत्ता भेज दिया है।

  1. इस तारकी तारीख उपलब्ध नहीं है। इस तारका मसविदा सी॰ एफ॰ एन्ड्रयूज द्वारा एस॰ एस॰ मेजेस्टिक नामक जहाजपरसे १५ जनवरी, १९२९ को लिखे गये पत्रके अन्तमें लिखा हुआ था। एन्ड्रयूजका यह पत्र गांधीजीको किसी समय फरवरीमें मिला होगा।
  2. साधन-सूत्रमें गांधीजीके निम्नलिखित निर्देश लिखे हुए हैं: "इसकी नकल और डा॰ मेहताके तारको आश्रमके पतेपर मणिलालको डाकसे भेज दो।" इससे यह बात स्पष्ट है कि यह तार गांधीजीने जब भेजा तब वह आश्रममें नहीं थे।
  3. गांधीजी १ मार्च, १९२९ को वर्मा-यात्रा के लिए रवाना हुए थे। पत्रके पाठसे स्पष्ट है कि इसे उस तारीख से पहले लिखा गया था।