ऐसा नहीं है। ईसाइयोंमें भी ऐसी विचारधाराके लोग मौजूद हैं--और उनकी संख्या बढ़ रही है--जिनका कहना है कि इस मामलेमें लोगोंपर कोई चीज थोपी नहीं जानी चाहिए बल्कि हरेक व्यक्तिको इस बातको छूट होनी चाहिए कि वह अपने ढंग से जीवन के गूढ़तम सत्योंकी खोज करे। इसकी पुष्टिमें यह तर्क दिया जाता है कि हरेक व्यक्तिको आवश्यकता तथा स्वभाव भिन्न-भिन्न होनेके कारण उनके अन्दर आध्यात्मिक खोजकी प्रक्रियाका भी तदनुसार अलग होना लाजिमी है। दूसरे शब्दों में उनका ऐसा खयाल है कि प्रचार शब्दके प्रचलित अर्थमें प्रचारका तरीका सबसे कारगर तरीका नहीं है।
आपके मुँहसे यह बात सुनकर मुझे खुशी हुई। वास्तवमें हिन्दू-धर्म लोगोंके मनमें यही बात बैठाता है।
आप ऐसे नवयुवकों को क्या सलाह देंगे जो अपनी कमजोरियोंको जीतनेके लिए विफल प्रयास कर रहे हैं और आपके पास सलाह लेनेके लिए आते हैं?
मैं उन्हें बस प्रार्थना करनेकी सलाह दूँगा। मनुष्यको अपने आपको बिलकुल दीन बना देना चाहिए और शक्तिकी प्राप्ति के लिए ईश्वरकी तरफ देखना चाहिए।
लेकिन यदि नवयुवकोंने यह शिकायत की कि उनकी प्रार्थनाकी सुनवाई नहीं होती और उन्हें ऐसा लगता है जैसे वे एक निर्मम ईश्वरके सामने खड़े बोल रहे हैं, तो फिर क्या होगा?
अपनी प्रार्थनाका उत्तर पानेकी कामना करनेका अर्थ है ईश्वरको प्रलोभन देना। यदि प्रार्थनासे कोई आराम नहीं मिलता तो ऐसी प्रार्थना केवल झूठी प्रार्थना है। यदि प्रार्थनासे ही कोई मदद नहीं मिली तो फिर किसी चीजसे नहीं मिलेगी। व्यक्तिको निरंतर प्रार्थना करते रहना चाहिए। नवयुवकोंको मेरा यही सन्देश है। नवयुवकोंको अपनी कमजोरियोंके बावजूद प्रेम और सत्यकी सर्वविजयी शक्तिमें विश्वास रखना चाहिए।
हमारे नवयुवकों के साथ दिक्कत यह है कि विज्ञान और आधुनिक दर्शनके अध्ययनते उनकी आस्थाको समाप्त कर दिया है और इस कारण वे अनास्था रूपी अग्निके ग्रास हो गये हैं।
इसका कारण यह है कि उनकी दृष्टिमें आस्था बुद्धि-जन्य चीज है, आत्मानुभव नहीं। जीवनके संघर्ष में बुद्धि कुछ हदतक तो हमारा साथ देती है लेकिन संकटकी घड़ी में यह हमें दगा दे देती है। आस्था तर्कसे परेकी चीज है। जब चारों ओर अन्धेरा ही दिखाई पड़ता है और मनुष्यकी बुद्धि काम करना बन्द कर देती है उस समय आस्थाकी ज्योति प्रखर रूपसे चमकती है और हमारी मददको आती है। हमारे नवयुवकोंको ऐसी ही आस्थाकी जरूरत है और यह तभी आती है जब कोई बुद्धिके घमंडको तिलांजलि देकर अपने-आपको उस ईश्वरके सामने पूर्ण रूपेण समर्पित कर देता है।
- [अंग्रेजीसे]
- यंग इंडिया, २१-३-१९२९४०-५