५९. तार : स्वामीको [१]
[ १८ जून, १९२९ अथवा उसके पश्चात् ][२]}}
द्वारा श्री
चमड़ा कमाने की मनाही पर धोलका जमीनकी शर्ते नामंजूर ।
बापू
अंग्रेजी (एस० एन० १५४०२ ) की फोटो - नकलसे ।
६०. पत्र : छगनलाल जोशीको
बुधवार [१९ जून, १९२९][३]
तुम्हारा पत्र मिल गया है। छगनलालका मामला थोड़ा नाजुक है । इस बारे में मिलनेपर ही पूछना। अब ज्यादा दिन नहीं हैं। डाह्याभाई अपनी पत्नीके साथ रहते हैं, और किस तरह रहते हैं, आदि मालूम हो जाये, तो सलाह दे सकता हूँ । इसकी भी चर्चा मेरे वहाँ आनेपर करना । यह तो चाहता ही हूँ कि वह हमारे पास रहे । तुमने सत्यमूर्तिको लिखा है इसलिए अब मैं नहीं लिख रहा हूँ। जो कुछ लिखा है ठीक लिखा है ।
अपना स्वास्थ्य बिगड़ने न देना । यहाँका कार्यक्रम लगभग पूरा हो गया है; अब एक ही जगह बाकी रह गई है। किन्तु डाक तो अलमोड़ा ही भेजी जा सकती है । यदि आराम करूँ तो ६ जुलाईको वहाँ पहुँच सकता हूँ; न करूँ तो ३० जून को । मनमें निर्णय नहीं कर पाया हूँ । गीताको समाप्त कर डालनेका इरादा है तो सही ।{{Smallrefs} }
- ↑ १ और
- ↑ २. दिनांक १८ जूनको साबरमतीसे छगनलाल गांधी द्वारा भेजे तारके उत्तरमें जो इस प्रकार है : " गोरक्षा मण्डलकी अपराह्नमें हुई बैठका कोई खर्च उठानेपर राजी नहीं। किराया हजार हो सकता है। चमड़ा कमानेका विरोध। उनकी भूमिपर चमड़ा न कमाया जाये तो शायद स्वीकार कर लें। पुरुषोत्तमदास सहायताके लिए आतुर । वे स्वीकृतिको सलाह देते हैं। वे बढ़ा हुआ किराया देने को तैयार । तार स्वामीको द्वारा श्री भेजें। " (एस० एन० १५४०२ ) । देखिए अगला शीर्षक और " पत्र: छगनलाल जोशीको ", २४-६-१९२९ भी ।
- ↑ ३. साधन-सूत्र के अनुसार ।