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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/११४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

बोझ था, उससे ज्यादा बोझ है । इसलिए मैं स्वयं तो यह काम नहीं कर सकता । यदि समाचार देनेका फैसला करूँ तो 'नवजीवन' की छपाई आदिका खर्च भी बढ़ाना पड़ेगा । उसका आकार भी शायद बड़ा करना पड़े। ऐसे नये कुशल व्यक्तियोंको नियुक्त करना पड़ेगा जिनका काम खबर देना ही हो । सामान्य कोटिके मनुष्यसे खबरें देनेका काम ठीक तरहसे नहीं बन सकता। इसलिए 'नवजीवन प्रेमी' खबरें देनेके कामको जितना आसान मानते हैं वह उतना आसान नहीं है । खबर देनेका काम कठिन है, मैं यह मानते हुए भी प्रस्तुत सूचनाको एकदम दरकिनार नहीं कर देना चाहता। इसलिए नीचेके प्रश्नोंके संक्षिप्त उत्तर द्वारा पाठकोंका अभिप्राय जानना चाहता हूँ ।

१. क्या आपको भी 'नवजीवन' प्रेमीका सुझाव पसन्द है ?

२. यदि है तो क्या आकार बढ़ाना जरूरी मानते हैं; या इसी आकारसे ही काम चल जायेगा ?

३. क्या आपको 'नवजीवन' के अतिरिक्त दूसरे पत्रोंको पढ़कर आवश्यक समाचार प्राप्त नहीं होते ?

इन तीनों प्रश्नोंका उत्तर पाठक मुझे पोस्टकार्डपर लिखकर भेजें तो काफी होगा । पोस्टकार्ड लिखें तो पास्टकार्डके बायें कोनेपर और लिफाफा भेजें तो लिफाफेके बायें कोनेपर 'नवजीवनके बारेमें' लिख दें जिससे यह पत्र मुझे जरूर मिल जाये । जितने पत्र मेरे नाम आते हैं उन सबको मैं पढ़ता हूँ, ऐसा सोचनेकी भूल तो कोई पाठक नहीं करता होगा । मेरे हाथ तो वही पत्र आते हैं जो मेरे साथियोंको लगता है कि मुझे पढ़ने ही चाहिए ।

{{Left|[ गुजरातीसे ]
नवजीवन, २३-६-१९२९

७२. तार : मोतीलाल नेहरूको[]

[ २३ जून, १९२९ या उसके पश्चात् ]

आपका तार। निःसन्देह मैंने पाँच तारीख सुझाई थी, पन्द्रह नहीं ।[]

गांधी

अंग्रेजी (एस० एन० १५४०५ ) की फोटो नकलसे ।

  1. १. २३ जूनको प्राप्त उनके तारके उत्तर में ।
  2. २. “ तार : मोतीलाल नेहरूको " २०-६-१९२९ के अनुसार ।