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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/१२१

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अनूठा मानपत्र
दूधके लिए मुख्यतः भैंसें पाली जाती हैं। गो-पालन बहुत कम है। (खेती के लिए बैल उत्तरी क्षेत्रसे मँगाये जाते हैं।) हमारे पास काफी चरागाहें नहीं हैं। किसानों द्वारा गोपालन न करनेका शायद यही प्रमुख कारण है ।
मजदूरों और किसानोंमें बड़े पैमाने पर शराबखोरीकी लत है । ईश्वरकी कृपासे हममेंसे कोई भी आदतन शराब नहीं पीता । वर्षमें कमसे कम तीन माह तक मलेरिया, मोतीझारा और हैजेका प्रकोप रहता है।
हड़तालें, अ० भा० चरखा संघ, कांग्रेस, स्वराज्य, हिन्दू-मुसलमानका सवाल, ये सभी शब्द या फिकरे, हम देहाती लोग आम तौरपर समझते ही नहीं। न तो कोई हमें समझानेका प्रयत्न करता है और न ही हम इतने साक्षर हैं कि इनके बारेमें कुछ जान सकें ।
हम सब आज इसलिए एकत्र हुए हैं कि आप हमारी ओरसे थोड़ेसे पैसोंकी भेंट स्वीकार करें, जो आपके सार्वजनिक कार्यमें काम आ सकते हैं। इस इलाके में पैदा होनेवाली कपास और उससे बनी वस्तुओंके कुछ नमूने भी हम भेंट कर रहे हैं जिससे आप उसकी किस्मका अनुमान लगा सकें। हम आशा करते हैं कि आप प्रभुसे हमारे स्वास्थ्यके लिए प्रार्थना करेंगे ताकि हम ईमानदारी के साथ अपनी रोजी कमानेके लिए रोज-रोज मेहनत करते रहें ।

मैंने इसकी भाषाको मूलकी अपेक्षा थोड़ी कुछ पठनीय बनानेकी कोशिश की है । इसकी सबसे बड़ी खूबी है - बिल्कुल सीधी बात कहना, थोड़ी विनोदप्रियताका पुट और प्रतिकूल परिस्थितियोंके बावजूद स्थितिकी सही सच्ची पकड़ । सचमुच यह बात आश्चर्यजनक है कि चरखेके सन्देशसे जिनके स्वार्थ टकराते हैं वे लोग भी सन्देशकी सचाई कैसे महसूस कर लेते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि देशके करोड़ों लोगोंके इस सहायक या अनुपूरक धन्धेको तबाह करनेकी और इस प्रकार उनको मुखमरीकी आगमें ढकेलनेकी जिम्मेदारी किस तरह तथाकथित उच्च वर्गोपर ही आती है। अस्पृश्यता और हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्धोंके बारेमें उनकी उक्तियाँ भी कम शिक्षाप्रद नहीं हैं ।

[ अंग्रेजीसे ]
यंग इंडिया,२७-६-१९२९