सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/१२८

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

८४. “ अनासक्तियोग "[]

मैंने गीताका गुजराती अनुवाद कर चुकने के दो वर्ष बाद अर्थात् २४-६-१९२९ को कोसानी में उसकी प्रस्तावना लिखी और उसके बाद समयानुसार[]पूरी पुस्तक प्रकाशित हुई । उसका हिन्दी, बंगला और मराठी अनुवाद भी हो गया है। उसके अंग्रेजी अनुवादकी भी लगातार मांग आती रही। मैंने प्रस्तावनाका अनुवाद यरवदा जेल में कर लिया था । मेरे जेलसे छूटनेके[] बाद वह अभीतक मित्रोंके पास पड़ा रहा और अब मैं उसे पाठकोंतक पहुँचा रहा हूँ। जिनको इस " जीवन पुस्तक" में कोई दिलचस्पी नहीं है, वे उसका इन स्तम्भों में दिया जाना क्षमा करेंगे। जिन्हें इस गीता- काव्यमें दिलचस्पी है और जो उसे अपने जीवनकी प्रथ-प्रदर्शिका मानते हैं, उनके लिए सम्भव है, मेरा यह नम्र प्रयास सहायता पहुँचानेवाला बने ।[]

जिस प्रकार मैंने स्वामी आनन्द आदि मित्रोंके प्रेमके वश होकर सत्यके प्रयोगों तक मर्यादित आत्मकथा[] लिखना आरम्भ किया था, उसी प्रकार इन मित्रोंके कहने से मैंने गीताजी का अनुवाद भी आरम्भ किया है। स्वामी आनन्दने असहयोग आन्दोलनके युगमें मुझसे कहा था : " आप गीताका जो अर्थ करते हैं वह हमारी समझमें तभी आ सकता है जब आप एक बार सम्पूर्ण गीताका अनुवाद कर जायें, उसपर कुछ टीका करनी हो तो करें और हम लोग एक बार उस अनुवादको आदिसे अन्ततक पढ़ जायें। आप अलग-अलग बिखरे हुए श्लोकोंमें से अहिंसा आदिका अर्थ निकालें, यह मुझे तो ठीक नहीं लगता । " मुझे उनकी इस दलीलमें तथ्य मालूम हुआ । मैंने उत्तर दिया : "मैं फुरसत मिलनेपर यह काम करूँगा ।" इसके बाद मैं जेलमें गया। वहाँ मैं कुछ अधिक गहराईसे गीताका अध्ययन कर सका । लोकमान्य (तिलक) का ज्ञान-

भण्डार[] मैंने पढ़ा। उन्होंने इससे पहले मुझे (गीता-रहस्यके) मराठी, हिन्दी और

 
  1. . गांधीजीने प्रस्तावना में सूचित किया है कि गीताका गुजराती अनुवाद प्रस्तावना समेत २४-६- १९२९ को समाप्त हो गया था; किन्तु उन्होंने महादेव देसाई और छगनलाल जोशीको लिखे अपने २८-६- १९२९ के पत्रोंमें यह कहा है कि मैंने कल ही गीताका अनुवाद समाप्त किया। इसलिए हमने इसकी तिथि २७-६-१९२९ मानकर खण्डमें इसका स्थान निश्चित किया है। अंग्रेजी अनुवाद १६-१२-१९२९ को प्रारम्भ किया गया था और वह यरवदा जेलमें ८-१-१९३१ को समाप्त हुआ। पहले यह अनुवाद यंग इंडियाके अंक में प्रकाशित हुआ था ।
  2. १२ मार्च, १९३०, नवजीवन प्रकाशन मन्दिर, अहमदाबादसे ।
  3. २६ जनवरी, १९३१ को ।
  4. ४. यह पहला अनुच्छेद अंग्रजी प्रस्तावना से लिया गया है। शेष गुजराती प्रस्तावनासे लिया गया है।
  5. देखिए खण्ड ३९ ।
  6. ६. गीता - रहस्य ।'