९१. चेचक और हैजा
एक पाठक लिखते हैं:
यहाँ इन दो-तीन महीनोंसे चेचक और हैजे वगैराका प्रकोप खूब बढ़ा। चेचकके बारेमें अनेक मान्यताएँ और भ्रम प्रचलित हैं। इस सम्बन्धमें 'नवजीवन' द्वारा कुछ प्रकाश डालनेकी कृपा करें। अपनी आरोग्य विषयक पुस्तकमें आप जो मत प्रकट कर चुके हैं, क्या इस बीच उनमें कुछ परिवर्तन हुआ है?
जबतक हम स्वयं ज्ञान-सम्पादन नहीं करते और जबतक स्त्रियोंसे हमारा व्यवहार ठीक नहीं होता तबतक अन्धविश्वासोंका साम्राज्य बना ही रहेगा। अन्धविश्वासका समूल नाश तो किसी भी समय नहीं हो सकेगा। किताबी-ज्ञान-सम्पन्न यूरोप और अमेरिकादि देशोंमें भी तो भ्रम फैले हुए हैं। जबतक मनुष्यको जीवन आदिका लोभ रहेगा तबतक ये अन्धविश्वास भी कम या ज्यादा तादादमें बने ही रहेंगे; मगर जैसे-जैसे हम अपने लोभको सीमित बनाते जायेंगे, वैसे-वैसे वहम कम होते जायेंगे।
फिर भी जहाँ भ्रम या अन्धविश्वासका ठीक-ठीक पता लग सके, वहाँ तो उसे हटाने का प्रयत्न करना जरूरी है। रोगोंको लेकर जब आदमी ओझों, सयानों, पण्डों वगैराको घुमाता है, छू-छा कराता है, तब वह पैसोंकी फिजूलखर्चीके साथही-साथ बिना मौत मरता भी है। चेचक जैसे रोगोंमें, जिनमें आम तौर पर औषधिचिकित्सा नहीं की जाती, वहमका राज्य अधिक जोरदार होता है। इस प्रकार शीतला माता (चेचक) भी खासी भेंट ले लेती है। इस भावनाके मूलमें धर्म नहीं, जीवनके लिए मोह है, लालच है। मेरा तो दृढ़ विश्वास है कि शीतलाके कोपको ठंडा करनेके लिए जो मन्नतें आदि की जाती हैं वे वहमकी वजहसे हैं, अतएव त्याज्य हैं।
अधिकांशमें यह साबित हो चुका है कि शीतला या चेचकका मूल गन्दगी है। जिसका खून कमजोर पड़ जाता है, उसे छूत भी लग जाती है। यह रोग, जितना माना जाता है, उतना भयंकर नहीं है। आरोग्य सम्बन्धी पुस्तकमें मैंने जो कुछ लिखा है, उसमें परिवर्तन करनेकी कोई वजह मुझे मालूम नहीं पड़ी है। कई मामलोंमें निजी तजुर्बेसे मुझे पता चला है कि योग्य शुश्रूषासे यह रोग मिट जाता है। मरीजको हवा और उजाला मिलना ही चाहिए। उसके कपड़े हररोज बदले जाने चाहिए। अनेक चिकित्सोंका अनुभव है के जल-चिकित्सासे लाभ होता है। आजकल तो किरण-चिकित्साका भी प्रयोग किया जाता है। यहाँ मेरा हेतु चेचकके उपचार बतानेका नहीं हैं; प्रचलित अन्धविश्वासोंकी बुराई बताना, उनके प्रति डर कम करना और इस तरह उन्हें समाप्त करना ही है। इलाज तो किसी जानकार परोपकारी वैद्य या डाक्टरका कराना चाहिए; अथवा जल-चिकित्सा वगैराका ज्ञान प्राप्त करके स्वयं इलाजको विधि समझ लेनी चाहिए।