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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/२२२

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९७. पत्र: लीलावतीको

१ जुलाई, १९२९

चि॰ लीलावती,

तुम्हारा पत्र मिला है। जमनाबहनको पढ़ा दिया है। वह तो अब थोड़े दिनोंमें वहाँ आने ही वाली है। उसे मिलते रहना। पेरीनसे मिलती रहती हो और उसके काममें मदद करती हो, यह तो बहुत अच्छा है। हम जहाँ भी हों वहीं आश्रमके नियमोंका पालन कर सकते हैं। एक क्षण भी खाली न बैठें, मन और शरीरको निरन्तर अच्छे कामों और विचारोंमें लगाये रखें, तो विकार नहीं पैदा होते हैं।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी॰ एन॰ ९३१५) की फोटो-नकलसे।

९८. पत्र: विट्ठलदास जेराजाणीको

१ जुलाई, १९२९

भाईश्री विट्ठलदास,

कृष्णदासके पत्रमें तुम्हारे बारेमें उसने जो लिखा था उसकी नकल इसके साथ भेज रहा हूँ। इसे भेजनेका अर्थ है कि तुम खादी बेचनेके शास्त्र पर वैसी एक पुस्तिका लिखो जैसी मगनलालने बुनाईके बारेमें लिखी थी।

मगनलाल स्मारकके बारेमें तुम्हारा पत्र मिल गया था। वह मेरे ध्यानमें है, किन्तु एकके बाद एक दूसरा काम आता रहा इसलिए उसके विषयमें मैं मौन रहा हूँ। घर-घर जाकर इसके लिए चन्दा इकट्ठा करनेकी इच्छा नहीं होती।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (एस॰ एन॰ ९७६८) की फोटो-नकलसे।