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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/२५४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

तुम दूध छोड़नेके जंजालमें न पड़ना। अभी दूधके त्यागके प्रयोगमें पूर्ण सफलता मिली है, इसका दावा मैं स्वयं नहीं करता। परन्तु अपनी गाड़ी किसी तरह चला लेता हूँ। क्योंकि त्याग सम्बन्धी मेरा यह आग्रह स्वतन्त्र और बहुत पुराना है। दूध लेकर मुझे परेशानी होती है। बादामको सूखे साफ कपड़ेसे पौंछ कर छिलके सहित बारीक पिसवा लेता हूँ। यह चूरा घीकी तरह हो जाता है। पहले तो मैं पानीमें भिगो कर छिलका उतार लेता था। पीछे मालूम हुआ कि इसके छिलकेमें भी कई क्षार हैं। इन्हें नहीं फेंकना चाहिए। इसके अतिरिक्त छिलका रेचक तो है ही। यदि तुम बादामका प्रयोग करो तो तुम्हें टमाटर, बन्द गोभी और चौलाईका ताजा साग, इनमें से एक चीज तो लेनी ही चाहिए। इन्हें लेनेसे 'ए' नामक विटामिन मिलता है जो सिर्फ या मुख्य रूपसे हरे पत्तोंमें होता है। आजकल इस विटामिनकी आवश्यकता बहुत मानी जाती है। साग, टमाटर या बन्द गोभी कच्चा ही लेना चाहिए। अग्निका स्पर्श होनेसे 'ए' विटामिन नष्ट हो जाता है। अब तुम्हारे पत्रकी किसी बातका जवाब देना बाकी रह गया नहीं लगता।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (सी॰ डब्ल्यू, ६०६५) की नकलसे।
सौजन्य: हरिभाऊ उपाध्याय।

१२६. तार: नागेश्वररावको

[१२ जुलाई, १९२९को अथवा उसके पश्चात्][]

नागेश्वरराव,

स्थिति उलझनपूर्ण। 'नवजीवन' का मैनेजरके आपसे बातचीत करके स्वयं निर्णय लेनेके लिए भेज रहा हूँ।

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५४२५) की माइक्रोफिल्म से।

  1. यह नागेश्वरराव द्वारा मद्रास भेजे तार, दिनांक १२ जुलाई, १९२९ के उत्तरमें भेजा गया था। मूल तार इस प्रकार था: "पुराने प्रेसपर ३,५०० की डिग्री। कागज व्यापारीकी ३,००० की माँग। प्रेसकी जमानतके लिए ७,००० की व्यवस्था कर रहा हूँ। कृपया पैसे तारसे भेजें।"