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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/२६९

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धागेसे बँधी नंगी तलवार

यह सरकार तो नंगी तलवारके बल पर कायम है। यह वह तलवार है जिसके द्वारा निरंकुश शासक जब चाहें, हम पर वार कर सकते हैं, और ये शासक भी वे जिनकी नियुक्तिमें जनताका कोई हाथ नहीं होता।

अतएव डाक्टर सत्यपालका कारावास इस बातकी घोषणा करता है कि १२४ (अ) को मिटानेके लिए देशव्यापी आन्दोलन किया जाये। मगर इस धारा या ऐसी अन्य धाराके मिटानेका अर्थ है, वर्तमान शासन-प्रणालीको मिटाना, दूसरे शब्दोंमें, स्वराज्य प्राप्त करना। अतएव वस्तुतः तो उस धाराको मिटानेके लिए भी उतनी ही शक्ति चाहिए जितनी स्वराज्य पानेके लिए आवश्यक है। यह बिलकुल मुमकिन है कि एक ओर तो सरकार इस धाराको समाप्त करनेका ढोंग रचे और दूसरी ओर छिपे जरियों से इसी धाराकी शक्तिका प्रयोग सुरक्षित रखा जाये। आज जनता न तो इस तरह धोखेमें रखी जा सकती है, न उसे धोखेमें रहना ही चाहिए। इसलिए अगर सचमुच हम यह महसूस करते हैं कि डा॰ सत्यपालके साथ अन्याय किया गया है——देशके आन्दोलनको क्षति पहुँचाई गई है, तो हमें चाहिए कि हम वर्तमान आन्दोलनको व्यापक बना दें और उसके बल पर एक ऐसी सरकार खड़ी करें, जो सचमुच हमारी प्रेम-पात्र हो, जिसे हम हृदयसे अपनी सरकार कह सकें। उस हालतमें न तो देशव्यापी राजद्रोहकी घटनाएँ ही घटेंगी, न राजकीय हत्याएँ होंगी, न हत्याओंके प्रयत्न किये जायेंगे और न जबर्दस्ती लादे गये शासनसे थक कर लोग ऐसे कामोंके प्रति छिपी हुई सहानुभूति ही रखेंगे। जिस दशाको हम असह्य समझते हैं, अगर उसे हमने खत्म नहीं कर दिया है तो इसका यह मतलब नहीं है कि हम उससे सन्तुष्ट हैं; अवश्य ही यह हमारी बेबसीका प्रमाण है। लेकिन यह बेबसी भी अब तेजीसे समाप्त हो रही है। यही देखना है कि इसका नतीजा खून-खच्चरसे पूर्ण अराजकतामें प्रति- फलित होता है, या सुव्यवस्थित सविनय अवज्ञा-भंग द्वारा हम अपना ध्येय प्राप्त करते हैं। यह बात ज्यादातर तो अंग्रेज शासकोंके रुख पर निर्भर रहेगी, मगर उससे भी अधिक यह स्वयं हम पर निर्भर है। अगर हम डाउनिंग स्ट्रीट या व्हाइट हालकी तरफ ताकना बन्द कर दें और अपनी फिक्र आप करने लगे, तो हमारी अधीरता मिट जायेगी। तब हम रचनात्मक कामोंमें इतने संलग्न हो जायेंगे कि अधीरताका विचार भी न आयेगा। मुझे शक है कि हममें से कई, स्वराज्यको तोहफेकी तरह प्राप्त करना चाहते हैं, एड़ी-चोटीका पसीना एक करके नहीं।

[अंग्रेजीसे]
यंग इंडिया, १८-७-१९२९