सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/२८८

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

१५३. पत्र: वी॰ एस॰ श्रीनिवास शास्त्रीको

साबरमती
२१ जुलाई, १९२९

प्रिय बन्धु,

मैंने आशा की थी कि आप पूर्वी आफ्रिकासे लौटनेके बाद कुछ लिखकर भेजेंगे। कृपया यह अवश्य लिखें कि आपने वहाँ क्या-कुछ किया। आशा है, आपका स्वास्थ्य ठीक है। मैं लगातार यात्रा करते रहनेके कारण अखबार कदाचित् ही देख पाता हूँ। जब कभी मौका मिलता भी है तो सरसरी नजर ही डाल पाता हूँ।

आपका,

अंग्रेजी (जी॰ एन॰ ८८१७) की फोटो-नकलसे।

१५४. पत्र: एन॰ ज़र्कोफ़को

[]

साबरमती
२१ जुलाई, १९२९

प्रिय मित्र,

आपका पत्र मुझे मिल गया है। वह अब तक मेरे कागजातोंमें पड़ा रहा। मैं यह पत्र उसकी पहुँच और धन्यवाद देनेके लिए ही लिख रहा हूँ। आशा है, किसी न किसी दिन उसपर विस्तारसे लिखनेके लिए कुछ घंटे निकाल ही लूँगा। इस बीच आपको इतना बतला दूँ कि परिस्थिति कुछ भी हो सभी प्रकारके युद्धोंको अवांछनीय करार देनेकी भावनाका समर्थन करते हुए मुझे तनिक भी संकोच नहीं है।

हृदयसे आपका,
मो॰ क॰ गांधी

एन॰ ज़र्कोफ़ महोदय
मास्को-६६
सोवियत संघ

अंग्रेजी (सी॰ डब्ल्यू॰ ९७०४) की फोटो-नकलसे।

सौजन्य: भारतमें सोवियत संघका राजदूतावास

  1. नई दिल्लीमें सोवियत संघ राजदूतावासके सांस्कृतिक विभाग द्वारा गांधी-दर्शन प्रदर्शनी (१९६९) में प्रदर्शित।