जो घड़ी मैं ले आया हूँ उसके बारेमें कमलासे झगड़ना नहीं चाहता था। इस भेंटकी तहमें जो प्रेम है, उसका मैं सामना नहीं कर सका। मगर घड़ी फिर भी इन्दुके लिए धरोहरके रूपमें रखी रहेगी। इतने तमाम छोटे-बड़े शरारतके पुतलोंसे घिरा रहकर मैं ऐसी खूबसूरत चोजको सुरक्षित नहीं रख सकता। इसलिए अगर कमला इन्दुको उसकी प्यारी घड़ी वापस दे दिये जाने पर राजी हो जाये तो मुझे बड़ी खुशी होगी।
कांग्रेसके ‘ताज’ पर मेरा लेख[१] लिखा ही जा चुका है। वह ‘यंग इंडिया’ के अगले अंकमें निकलेगा।
तुम्हारा,
बापू
- [अंग्रेजीसे]
- ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स
१७१. पत्र: नारायणदास मलकानीको
२९ जुलाई, १९२९
आश्रम लौटते समय रेलगाड़ी में मैंने तमिलनाडु सम्बन्धी तुम्हारी रिपोर्ट[२] अभी पढ़ी। रिपोर्ट अच्छी है। उसकी स्पष्टवादिता मुझे पसन्द आई। इसे मैं वरदाचारी[३] के पास उनके विचार जाननेके लिए भेज रहा हूँ?
वहाँकी बाढ़का क्या हाल है?
तुम्हारा,
बापू
अंग्रेजी (जी॰ एन॰ ८९३) की फोटो नकलसे।