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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/३३३

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१९७. पत्र: जवाहरलाल नेहरूको

७ अगस्त, १९२९

प्रिय जवाहरलाल,

पुस्तकके नामके रूप में “डान ऑफ हिस्ट्री’ [इतिहासका उषाकाल] मुझे पसन्द नहीं। ‘लैटर्स टु इन्दिरा’ [‘इन्दिराके नाम पत्र’] की अपेक्षा ‘ए फादर्स लैटर्स टु हिज डाटर’ [‘पिताके पत्र पुत्रीके नाम’] नाम शायद ज्यादा अच्छा रहेगा। वैसे पहले पर भी मुझे कोई आपत्ति नहीं।

मानता हूँ कि कमलाको बार-बार उभरनेवाली इस पीड़ासे छुटकारा मिल जाये। यदि डाक्टर लोग आपरेशन करानेकी सलाह दें, तो मैं वह जोखिम उठानेको तैयार हो जाऊँगा।

घड़ीको मैं अलग तालेमें रख रहा हूँ और वहाँ आते समय साथ लेता आऊँगा।

मैं ११ तारीखको जिन्नासे मिलने बम्बई जा रहा हूँ। सरोजिनी देवीकी उत्कट आशावादिता सराहनीय है। परन्तु मैं कोई बड़ी आशा बाँधकर बम्बई नहीं जा रहा हूँ।

तुम्हारा,
बापू

[अंग्रेजीसे]

गांधी-नेहरू कागजात, १९२९।

सौजन्य: नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय

 

१९८. पत्र: देवचन्द पारेखको

आश्रम, साबरमती
७ अगस्त, १९२९

भाई देवचन्दभाई,

तुम्हारा पोस्टकार्ड मिला। समितिपर नियुक्त होनेका विचार छोड़ दिया सो अच्छा किया है।

भाई जवाहरलालको रेवाशंकरभाई अथवा दरबार साहब मानपत्र दें। मैं सोचता हूँ कि दरबार साहब उपस्थित तो रहेंगे ही। वल्लभभाई तो तब मद्रास प्रदेशमें होंगे।

बापू

गुजराती (जी॰ एन॰ ५६९७) की फोटो-नकलसे।