माताकी बीमारी से बचे रहे, खुद वे भी बचे रह सकते हैं। अपनी टिप्पणीमें मैंने केवल एक मनोवैज्ञानिक तथ्यका उल्लेख-भर किया था। यदि टीका विरोधी सज्जनवृन्द तथ्यों के बारेमें पूरी तरह सावधान रहें, जनताके पूर्वग्रह और भयको उनका ठीक स्थान दें तथा अनिवार्य रूपसे टीका लगवानेके प्रति धीरजके साथ लोकमत तैयार करें तो काफी काम में अवधिके भीतर ही वे सुधार करा लेनेके बारेमें आश्वस्त हो सकते हैं। यदि भारतका शिक्षित समाज ऐसी बातोंके प्रति उदासीन न रहे तो ऐसी एक बातको अनिवार्य बनाया ही नहीं जा सकता था जिसके विषय में गण्यमान्य चिकित्सकोंकी राय सुधारकों की बातके पक्षमें जाती है और जिसके विषयमें ऐसे आंकड़े भी प्राप्त हैं जो इस अनिवार्यता के खिलाफ कुछ नहीं तो एक तर्कसम्मत पक्षका निर्माण तो कर ही देते हैं। यदि मेरे पड़ोसियोंको रोगकी छूतका डर हो तो मैं अनिवार्य रूपसे अपनेको उनसे दूर कर दिये जानेकी बात तो समझ सकता हूँ किन्तु जिस कामके प्रति मुझे धर्म और स्वास्थ्य के आधारपर आपत्ति है उसे करानेपर मैं मजबूर नहीं किया जा सकता। समाजको मुझसे अपनी रक्षा पानेका अधिकार तो है; किन्तु मेरी हो रक्षाके लिए मुझपर जबर्दस्ती कोई चीज लादनेका उसे कोई अधिकार नहीं है। मुझे गलती करनेका अधिकार―जबतक मेरी गलती किसी औरको खतरेमें नहीं डालती-मेरी आजादीका सार तत्त्व है।
एक देशभक्तका देहान्त
- एक संवाददाता लिखते है:[१]
- मुझे यकीन है, आपको यह जानकर हार्दिक दुःख होगा कि लाला बाँके-दयाल, जो साप्ताहिक ‘झंग सियाल’ के सम्पादक और पंजाबके एक निःस्वार्थ कांग्रेसी कार्यकर्त्ता थे अब नहीं रहे। . . . शायद आपको याद होगा कि उन्होंने आपके प्राइवेट सेक्रेटरीकी तरह काम भी किया था और फौजी कानून के अत्याचारों के सम्बन्ध में निकलनेवाली कांग्रेसकी रिपोर्टके लिए पंजाबके कुछ गाँवोंसे उन्होंने प्रमाण एकत्र करने और उनको छाँटनेका काम किया था। लाला बाँकेदयालजीने गरीबीको जिन्दगी बिताई। उन्हें भूखों भी मरना पड़ा। क्या आप उनके आश्रितोंका कष्ट दूर करानेके लिए पंजाब कांग्रेसको अथवा किन्हीं उदार व्यक्तियोंको प्रेरित करेंगे? बाँकेदयाल जैसे आजीवन कार्यकर्ता और निःस्वार्थ देशभक्त इससे कुछ अधिकके अधिकारी हैं।
जब मैं कांग्रेसकी औरसे फौजी कानून-सम्बन्धी अत्याचारोंकी जाँच करनेके लिए पंजाब गया था तब मुझे लाला बाँकेदयालके सम्पर्क में आनेका अच्छी तरह स्मरण है। संवाददाताने उनकी सेवाओंके बारेमें जो-कुछ लिखा है, उसकी मैं पुष्टि कर सकता हूँ। मैं दिवंगतके कुटुम्बके प्रति समवेदना प्रकट करता हूँ। इसमें सन्देह नहीं कि पंजाब के सम्पन्न कांग्रेसजनों को उनके परिवारकी स्थितिकी जाँच करनी चाहिए
- ↑ अंशत: उद्धृत।