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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/३४१

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बिना राँधा आहार

करते हैं या शरीरके बारेमें लोगों में जितना अज्ञान है, उतना अन्य किसी चीज के बारेमें नहीं। शरीरको, ईश-मन्दिर समझने के बजाय, उसे हम लोग भोगका साधन समझते हैं और अपनी इस प्रवृत्तिको बढ़ावा देने और इस प्रकार पार्थिव शरीरका दुरुपयोग करने के लिए, निर्लज्जतापूर्वक चिकित्सकका सहयोग लेने दौड़ते हैं।

परन्तु हम अब आजतक प्राप्त परिणामोंको लिख डालें।

१. [उद्योग] मन्दिरमें मेरे साथ इस प्रयोगमें शामिल लोगोंकी संख्या अब बाईस हो गई है। इनमें से अधिकांशने दूध छोड़ दिया है।

२. वे अब भोजनके साथ केले भी लेने लगे हैं और नारियलकी मात्रा बढ़ा दी है।

३. यह बात पर्याप्त विश्वासके साथ कही जा सकती है कि दूध पीना जारी रखनेसे कमजोरी आने अथवा किसी अन्य प्रकारके अनिष्टकारी परिणामका भय नहीं रह जाता।

४. बिना राँधे अंकुरित अन्नों या दालों और बिना राँधी हरी सब्जियोंको हजम करनेमें कोई कठिनाई नहीं होती।

५. अजीर्णसे पीड़ित लोगोंमें से अधिकांश लोगोंको अन्नों और दालोंका प्रयोग छोड़ देना पड़ा। उन्होंने नारियलका पानी तथा घिया, कद्दू, ककड़ी आदि हरी सब्जियाँ अच्छी तरह धोकर काफी मात्रामें छिलके सहित खानी आरम्भ की। नारियलका पानी तैयार करनेके लिए ऐसे नारियलको जो सूखा न हो बारीक पीसकर, उसमें नारियलका ही अथवा सामान्य जल मिलाकर और उसे फेंटकर मोटे कपड़ेसे छान लिया जाता है। इस प्रकार बिना किसी हानिके या बेचैनी महसूस किये पूराका-पूरा नारियल लिया जा सकता है।

६. अधिकांश लोगोंका वजन घट गया है। किन्तु बिना रांधे भोजनकी सिफारिश करनेवाले चिकित्सा-विशेषज्ञ, इस बातपर जोर देते हैं कि इस प्रकार वजन घटना एक हदतक शरीरकी स्वस्थ प्रक्रियाका सूचक है और इस बातका प्रतीक है कि शरीर विषैले पदार्थोंको निकाल रहा है।

७. अधिकांश लोग अभीतक कमजोरीका अनुभव करते हैं, लेकिन उल्लिखित प्रामाणिक मतपर―कि ऐसे प्रयोगों में कमजोरी आना बीचकी एक अनिवार्य स्थिति है―विश्वास रखकर वे अपने प्रयोगोंमें लगे हुए हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं कि माँड व चिकनाईयुक्त खाद्य-पदार्थोके अत्यधिक प्रयोगके कारण बढ़ा हुआ पेट तबतक खालीपन महसूस करता है जबतक उसका आकार सामान्य नहीं हो जाता।

८. प्रयोग आसान नहीं है। इनके परिणाम भी चमत्कारिक नहीं होते। इसके लिए धैर्य, लगन और सावधानी आवश्यक होती है। प्रयोग करनेवाले प्रत्येक स्त्री-पुरुषको अपने शरीरके लिए उपयुक्त विभिन्न खाद्य-पदार्थों और उनकी मात्राका सन्तुलन स्वयं निश्चित करना होता है।

९. हममें से लगभग प्रत्येक व्यक्तिने पहलेसे अधिक स्पष्ट मानसिक शक्ति और स्फूर्तिदायक आत्म-शान्तिका अनुभव किया है।