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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/३४५

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पति धर्म

मुझे यह जानकर आश्चर्य नहीं होगा कि ये लेख खुफिया पुलिसके किसी प्रतिनिधि द्वारा लिखे गये हैं। इतने जहरीले लेख लिखनेका और कोई कारण दिख नहीं पड़ता।

हिन्दू महासभाको चाहिए कि वह गन्दे सनातनी अखबारोंको रोके। आर्यसमाजियोंसे मैं प्रार्थना करता हूँ कि वे ऐसे लेखोंको पढ़ें ही नहीं, और अगर पढ़ें भी, तो गुस्सा न करें। साथ ही अपने अखबारोंमें उनका जिक्र तक न करें। गन्दे लेखक विरोधके भूखे हैं; क्योंकि विरोध ही उनकी खुराक है। स्वामी दयानन्दका चरित्र इतना बलवान था, उनकी जन-सेवा इतनी महान् थी कि स्वार्थी अथवा ज्ञानहीन लेखकवर्ग उसे तनिक भी हानि नहीं पहुँचा सकता। यदि वे सब्र रखेंगे तो ऐसे गन्दे लेख अपने-आप बन्द हो जायेंगे। यदि कोई ऐसे लेखोंकी टीका ही न करें, इनका ख्याल तक छोड़ दे तो इस धन्धेका स्वयं ही लोप हो जाये।[]

हिन्दी नवजीवन, ८-८-१९२९

२०७. पति धर्म

एक मित्र लिखते हैं:[]

पतिवर्ग पत्नी-धर्मका उपदेश देनेके लिए सदा उत्सुक रहता है, और पत्नियों से यहाँतक कहा जाता है कि वे अपनेको पतिकी मिल्कियत समझें। पति तो मानता ही है कि उसे पुरुषके नाते जो अधिकार अपने घर-बार, जमीन-जायदाद और पशु इत्यादि पर प्राप्त हैं, ठीक वही अधिकार उसे पत्नी पर भी प्राप्त है। इस बातके समर्थन में रामायण-जैसे ग्रन्थका भी अवलम्बन लिया जाता है:

ढोल गंवार शूद्र पशु नारी,
ये सब ताड़नके अधिकारी।

रामायणकी इस पंक्तिका आधार लेकर समाज में पत्नी दण्डनीय ठहराई जाती है, उसे दण्ड दिया जाता है। मुझे विश्वास है कि यह चौपाई गो॰ तुलसीदासजीकी नहीं है, यदि है भी तो कह सकते हैं कि इन शब्दोंमें तुलसीदासजीने अपना अभिप्राय नहीं प्रकट किया है, बल्कि अपने समय में प्रचलित रूढ़िका निरूपण किया है। यह भी असम्भव नहीं कि इस बारेमें सहज ही उन्होंने उस समयकी प्रथा पर विचार किये बिना ही अपनी ऐसी सम्मति दे दी हो। रामायण भक्ति-निरूपणका ग्रन्थ है। गो॰ तुलसीदासने सुधारककी दृष्टिसे रामायण नहीं लिखी है। यही कारण है कि उन्होंने रामायण में अपने जमानेकी बातोंका प्रकृत चित्र खींचा है, सहजभावसे उनका वर्णन किया है। इस वर्णनके सदोष होनेपर भी रामायण-जैसे अद्वितीय ग्रन्थका महत्व कम नहीं होता। जैसे, रामचरितमानससे भूगोलकी शुद्धताकी आशा नहीं की जा

  1. देखिए पृष्ठ २९७।
  2. यहाँ नहीं लिया गया है। पत्र-लेखकने अपने एक मित्रका उल्लेख किया था जो पत्नीको अच्छी गृहिणी न माननेके कारण उसले असन्तुष्ट थे और उसका परित्याग करना चाहते थे। पत्रमें पति-पत्नीके पारस्परिक अधिकारोंकी बात उठाई गई थी।