देखनेवाले साफ-साफ देख सकते हैं कि जगत्की गति शान्तिकी ओर है। मानव-जातिका शरीर तो मनुष्यका है, मगर अभी उसने पशु-स्वभावका त्याग नहीं किया है। उसे यह स्वभाव छोड़ना ही पड़ेगा। इसी कारण कुत्ते बिल्लीकी मिसाल बेठिकाने है और हमारे लिए अशोभनीय है। हम कुत्ते-बिल्ली नहीं हैं; हम दो पैरोंपर सीधे खड़े होनेवाले, आत्माको पहचाननेको इच्छा रखनेवाले और बुद्धिशक्ति रखनेवाले प्राणी हैं।
और रामचन्द्र? कौन सिद्ध कर सका है कि रामचन्द्रने लंकामे खूनकी नदी बहाई थी? दस सिरवाला रावण कब जन्मा था? बन्दरोंकी फौज किसने देखी थी? रामायण धर्म-ग्रन्थ है; रूपक है। करोड़ों लोग जिस रामकी पूजा करते हैं, वह राम घट-घट व्यापी है। रावण भी हमारे ही शरीरमें रहनेवाले दस सिरवाले विकराल विकारोंका रूप है। उसके खिलाफ अन्तर्यामी राम सदा युद्ध करता है। वह तो दयाकी मूर्ति है। अगर किसी ऐतिहासिक रामने किसी ऐतिहासिक रावणसे युद्ध किया भी हो तो उससे हमें बहुत-कुछ सीखनेको नहीं मिलता। इन प्राचीन राम-रावणको खोजने की क्या जरूरत है? आज तो वे जहाँ-तहाँ मिलते ही रहते हैं। सनातन राम ब्रह्म-स्वरूप है, सत्य और अहिंसाकी मूर्ति है।
भारतकी समस्या न तो क्रोधसे सुलझेगी, न रामायणादि ग्रन्थोंके अर्थका अनर्थ करनेसे और न पशुओंकी नकलसे। इस समस्याको हल करनेके लिए हमें अपने आपको पहचानना पड़ेगा। अहिंसात्मक असहयोग भारतको उसके मनुष्यत्वकी याद दिलानेवाली चीज है। भले ही करोड़ों लोग एक-साथ इस बात में श्रद्धा न रखें। हथियार उठानेके लिए भी करोड़ों तैयार कहाँ बैठे हैं? करोड़ों तैयार हो भी नहीं सकते। अहिंसात्मक युद्धमें अगर थोड़े भी मर मिटनेवाले लड़ाके होंगे, तो वे करोड़ोंकी लाज रखेंगे और उनमें प्राण फूँकेंगे। अगर यह मेरा स्वप्न है, तो भी मेरे लिए मधुर है। आकाश कुसुम है, तो मी मेरी कल्पनाकी आँखोंमें उसकी शोभा है, और उसमेंसे सौरभ फैलता ही रहता है।
- [गुजरातीसे]
- नवजीवन, ११-८-१९२९
२१८. बिना राँधे आहारका प्रयोग
इस सप्ताह मैं इस प्रयोगके बारेमें केवल प्रगतिका ही जिक्र नहीं कर सकता। मुझे दो व्यक्तियोंसे प्रयोग छोड़नेको कहना पड़ा है, क्योंकि उनकी कमजोरी और कब्जियतका मैं कोई उपाय नहीं खोज सका और आखिर मुझे हारकर उनका यह प्रयोग बन्द कराना पड़ा। अपने और दूसरोंके शारीरिक प्रयोगोंके आधार पर मैं मानने लगा था कि नारियलका दूध और सब्जी हरएक की कब्जियत मिटाने में समर्थ हो सकेंगे। मगर यहाँ यह नहीं हुआ। काफी तादादमें नारियलका दूध और सब्जी लेते हुए भी उनकी कब्जियत नहीं गई। किन्तु खुद मुझपर इसका दूसरा असर हो रहा है। कब्जियतका तो नाम भी नहीं रह गया है; उलटे नारियलके दूध और सब्जीके असर से अधिक रेचन होने लगा है। यह कोई अच्छा लक्षण नहीं है।