यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
३३०
सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
- खादीके ही रूपमें खरीदने और अपनी शालाओं में कताई शुरू करनेका निश्चय किया है। लेकिन अब तक सबसे अधिक साहसपूर्ण निश्चय करनेका श्रेय तो मध्यप्रदेशकी मुड़वारा नगरपालिकाको है, जिसने तमाम विदेशी वस्त्र पर फी मन २ आनाके बजाय चुंगीको दर फी मन २ रुपये कर दी है। यह कहना अनावश्यक है कि उसने हाथ-कती खादी परसे चुंगी उठा ली है।
- सिन्धमें बिक्रीके १८ केन्द्र चल रहे हैं―७ कराचीमें और एक-एक हैदराबाद, नवाबशाह, भिरिया, हालनी, टाल्टी, रोहरी, सक्कर, शिकारपुर, नौशहर, फीरोज, लरखाना, और जैकोबाबादमें।....
- आगरा में एक विशेष समितिको सोधी देखभाल में विदेशी वस्त्र बहिष्कारके लिए २५ स्वयंसेवक काम कर रहे हैं। उन्होंने २५० घरोंमें फेरी लगाकर ३००) की खादी बेची और १०० आदमियोंसे विदेशी वस्त्रके त्यागकी प्रतिज्ञा करवाई।
- मेमनसिंह (बंगाल): छ: मैजिक लैंटर्न और स्लाइडोंके साथ १२ व्याख्यानदाता जिले-भर में दौरा कर रहे हैं। उन लोगोंने २०० से भी ज्यादा सार्वजनिक सभाओं में लगभग ३०० व्याख्यान दिये और कई जगहों में विदेशी कपड़ों की होली भी जलाई।...
लेकिन हम यह न भूलें कि विदेशी वस्त्र बहिष्कार समितिकी अपनी सीमाएँ हैं। जबतक तमाम कांग्रेस-समितियोंकी ओरसे स्वेच्छापूर्ण, बुद्धियुक्त और दृढ़ सहयोग नहीं मिलता, तबतक हमारा इस सालके भीतर बहिष्कार कार्यको सफल कर दिखाने का इरादा पूरा नहीं हो सकेगा। इस कार्य पर अभी और अधिक शक्ति केन्द्रित करनेकी जरूरत है।
- [अंग्रेजीसे]
- यंग इंडिया, १५-८-१९२९
२३२. कुछ धार्मिक प्रश्न
एक भाई नीचे लिखे प्रश्न पूछते हैं:
- १. “धर्मका वास्तविक रूप तथा उद्देश्य: ―आज धर्मके नाम पर कैसे-कैसे अनर्थ होते हैं? जरा-जरा सी बातोंमें धर्मकी दुहाई दी जाती है; किन्तु ऐसे कितने मनुष्य हैं जो धर्मके उद्देश्य तथा रहस्यको जानते हों? इसका एक-मात्र कारण धार्मिक शिक्षाका अभाव है। मुझे आशा है, आप इसपर और नीचे लिखे दूसरे प्रश्नों पर ‘हिन्दी नवजीवन’ द्वारा अपने विचार प्रकट करने का कष्ट स्वीकार करेंगे।
- २. मनुष्यकी आत्माको किन साधनों द्वारा शान्ति मिल सकती है और उसका इहलोक व परलोक बन सकता है?