२४६. तार: घनश्यामदास बिड़लाको
साबरमती
१९ अगस्त, १९२९
८, रायल एक्सचेंज, कलकत्ता
कलसे दही आरम्भ। चिन्ता न करें।
गांधी
अंग्रेजी (सी॰ डब्ल्यू॰ ७८८३) से।
सौजन्य: घनश्यामदास बिड़ला
२४७. पत्र: प्रभावतीको
मौनवार, १९ अगस्त, १९२९
यह पत्र चारपाई पर पड़े-पड़े लिख रहा हूँ। पेचिश हो जानेके कारण कच्चे अनाजका प्रयोग छोड़ दिया है। आज तबीयत ठीक है। थोड़े दिनोंमें पूरी शक्ति आ जायेगी। तनिक भी चिन्ता करनेका कारण नहीं है। यात्राका कार्यक्रम भेज दूंगा। इस समय मेरे पास नहीं है। तुम्हारा पत्र मिल गया है। अब ससुरालसे क्या लिखती हो, इसकी राह देख रहा हूँ। ईश्वर सब ठीक ही करेगा। कोई कठिनाई नहीं हुई होगी और होगी भी तो पार कर लेना।
कल मुझे बकरीके दूधका दही लेना पड़ा। डाक्टरका ख्याल था कि उसके बिना पेचिश दूर नहीं होगी। मुझे उसमें हठ करनेकी बात नहीं दिखाई दी। जयप्रकाशका पत्र तो मैंने फाड़ दिया है। प्रश्नोंको अभी के अभी याद करने लायक समय नहीं है। याद आ गये तो उत्तर लिख दूंगा।
जितना अपने-आप सीख सको, उतना सीखना।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (जी॰ एन॰ ३३५७ ) की फोटो-नकलसे।