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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/३८०

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२४८. तार: राजेन्द्रप्रसादको

सोमवार, [१९ अगस्त, १९२९][]

सतीशचन्द्र मुखर्जीको मेरी ओरसे दो सौ पचास रुपये दे दीजिए।

गांधी

राजेन्द्रप्रसाद

खादी भण्डार

मुजफ्फरपुर

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५४९८) की फोटो-नकलसे।

 

२४९. तार: चक्रवर्ती राजगोपालाचारीको[]

[१९ अगस्त, १९२९ अथवा उसके पश्चात्]

राजा

वल्लभभाईको जानेकी तैयारीकी सलाह दे रहा हूँ। बिना राँधे भोजनका प्रयोग सदाके लिए समाप्त नहीं हो रहा है। सकता। स्वास्थ्य ठीक ही चल रहा है।

बापू

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५४७९) की फोटो-नकलसे।

  1. तारके मसविदेवाले कागजपर “सोमवारको हुई बातचीत और तत्सम्बन्धी निर्देश” लिखा हुआ है। साबरमती आश्रम के रजिस्टर के अनुसार इसकी तारीख़ १९ अगस्त, १९२९ है; यह सही प्रतीत होती है; क्योंकि १९ अगस्तकी सोमवार था और इसी कागजपर गांधीजीके स्वाक्षरोंमें लिखा है: “मुझे असमके बारेमें हरिवल्लभदासकी रिपोर्ट चाहिए।” जो स्पष्ट ही असमकी बाढ़के बारेमें है। देखिए “असमके बाढ़ पीड़ितोंकी सहायता”, १८-८-१९२९। इस तारकी एक प्रति सतीशचन्द्र मुखर्जीको भी भेजी गई थी, क्योंकि ऊपर लिखे तारके मसविदेके नीचे गांधीजीने लिखा है: “सतीशचन्द्र मुखर्जी, द्वारा” और इसके बाद लिखा है: “कृपया इन्हें भेज दें...।”
  2. साबरमती में १९ अगस्तको प्राप्त राजगोपालाचारीके दिनांक १८ अगस्तके उत्तरमें; तार इस प्रकार था: “विश्वास है कि ऐसे एक प्रश्नपर मतभेद होनेसे कोई हानि नहीं होगी, जिसे कोई भी वास्तविक प्रश्न नहीं मानता। वल्लभभाईको अध्यक्षता नैतिक-बलकी दृष्टिसे आपकी उपस्थितिके समान ही होगी। प्रार्थना है निराश न करेंगे। बिना राँधे भोजनके प्रयोगको आपने सदाके लिए समाप्त कर ही दिया। आशा है, सूजन कम हो रही होगी”।