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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/३९१

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२६१. टिप्पणियाँ

एक समादरणीय त्याग

स्वर्गीय लाला लाजपतराय द्वारा संस्थापित लोक-सेवक-समितिसे पूरी तरह सम्बद्ध हो जानेके लिए श्रीयुत पुरुषोत्तमदास टण्डनने एक प्रसिद्ध बैंक के मैनेजर-पदसे इस्तीफा दे दिया है; वैसे यह पद आर्थिक दृष्टिसे बहुत ही लाभप्रद था। लालाजीने अपनी समिति के लिए बड़े-बड़े नियम बनाये थे। उनके अनुसार समितिका कोई भी आजीवन सदस्य ज्यादा आय देनेवाला काम नहीं कर सकता। श्रीयुत पुरुषोत्तमदास टण्डन स्वर्गीय लालाजीको बड़े प्रिय थे, अतः टण्डनजीका यह त्याग उन दिवंगत देशनेताके प्रति उनकी कर्त्तव्य-बुद्धि और अनुसरणका बाह्य चिन्ह-मात्र है। हमारी दृष्टिमें जो काम बड़े साहसका है, श्री टण्डनजीकी निगाह में वह कुछ भी नहीं। ऐसे त्याग उनके जीवनके अंग बन गये हैं। पिछले कई बरसोंसे पैसेके लिए पैसा कमानेके सिद्धान्त परसे उनकी श्रद्धा उठ गई है। वे बड़ी तेजीसे――लगातार अपने जीवनको सादा बनाते रहे हैं। लेकिन कौटुम्बिक दायित्व तो उनपर था ही; और उससे वे तबतक इनकार नहीं कर सकते थे जबतक कि अपने उच्च जीवन और विकास में उन कुटुम्बियोंको भी साथ न ले लेते, जिनकी उनपर जिम्मेदारी है। अब यह स्पष्ट है कि उनके मार्गकी ये कठिनाइयाँ दूर हो गई हैं, उन्होंने इनपर विजय पा ली है, और अब हमेशा के लिए वे नये क्षेत्रमें डट सकते हैं।ऐसे ही लोगोंसे राष्ट्रोंका निर्माण होता है। मैं लालाजीकी समितिको इस अवसर पर बधाई देता हूँ। लेकिन क्या जनता इस त्यागकी पात्र है? लालाजी स्मारकके लिए जो रकम माँगी गई थी वह अब तक पूरी-पूरी इकट्ठी नहीं हुई। खेद है कि एक भारतीय नररत्नके स्मारकके लिए माँगी गई पाँच लाखकी नगण्य-सी राशि भी अब तक एकत्र न हो पाई। क्या मैं आशा करूँ कि टण्डनजीका त्याग आलसियोंको कर्मण्य बनायेगा और देश उसका समुचित उत्तर देगा।

सिन्धका जल प्रलय,

मैं जानता था कि सिन्धमें दूसरी बार भयंकर बाढ़ आ चुकी है, मगर फिर भी जानबूझकर अब तक चुप था। अबकी बारकी बाढ़ने पहलेसे कहीं अधिक सर्वनाश किया है। मगर ‘अतिपरिचयात्’ अवज्ञा हो रही है। लेकिन इससे बाढ़ पीड़ितोंके कष्ट कुछ कम नहीं हुए। बाढ़के कारण जो भीषण हानि हुई है उसका कुछ तफसीलवार ब्यौरा आचार्य मलकानीने मेरे पास भेजा है। ताजी खबर यह है कि बाढ़के बाद पीड़ित प्रदेश में हैजा फूट पड़ा है। जो दाता असम-बाढ़ पीड़ितोंकी सहायताके लिए दान भेज रहे हैं उन्हें मेरी सलाह है कि वे दोनों जगहोंके लिए अपनी रकमें एक साथ भेजें और उनकी व्यवस्थाका भार मेरी व्यवहार कुशलता पर छोड़ दें। अबसे आगे जो रकमें किसी खास प्रदेशके नामसे न भेजी जायेंगी, उन्हें मैं दोनों बाढ़-

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