है, ताकत आती जा रही है । हठपूर्वक घूमना जारी रखो। यहाँ आजकल खूब बरसात हो रही है । खुराकमें दही विशेष रूपसे ले रहा हूँ ।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (एस० एन० ९२६२ ) से तथा (सी० डब्ल्यू० ५०९ ) से भी । सौजन्य : वसुमती पण्डित ।
२७७. पत्र : प्रभावतीको
मौनवार, २६ अगस्त, १९२९
तुम्हारे पत्र बराबर मिलते रहते हैं । तुम चिन्ता करना छोड़ दो। अशान्ति में शान्ति प्राप्त करना सोख लो। बाह्य संयोग हमेशा हमारी मनकी मर्जीके अनुसार नहीं होते । किन्तु मनको उनके कारण विचलित न होने देना तो हमारे हाथमें ही है । प्रतिकूल संयोग में भी सेवाका मौका ढूंढ लें । हम विरोध करनेवालेसे भी प्रेम ही करें।
आगरा आनेका प्रबन्ध तो तुम्हीं कर लोगी न ? मैं यहाँसे किसे लिखूँ ? तुम्हें साहसके साथ अपना रास्ता अपने-आप साफ करना है। ईश्वर तो सहायता करेगा ही ।
मेरी तबीयत तो अच्छी हो ही रही है। सिर्फ दही और दूध ले रहा हूँ । फल भी लेता हूँ । अब थोड़ा घूमने भी जाता हूँ । लिखना और कातना तो बिल्कुल हो बन्द नहीं हुआ है । इसलिए मेरे बारेमें चिन्ता नहीं करना । अध्ययनके बारेमें मैंने लिख दिया है ।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (जी० एन० ३३५४ ) की फोटो - नकलसे ।
२७८. पत्र : छगनलाल जोशीको
२६ अगस्त, १९२९
शिवाभाईको स्वतन्त्र काम नहीं सौंप सकते किन्तु यदि वह उद्योग मन्दिरमें रहना चाहें तो जैसा उन्होंने कल कहा था वैसे अपने खाने-पीनेका प्रबन्ध करके रह सकते हैं। इस विषय में और कुछ पूछना हो तो पूछ लेना ।
बापू
गुजराती (एस० एन० १५५१०) की माइक्रोफिल्मसे ।