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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/४१७

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राजपूतानामें कताई - स्वावलम्बन

रींगसमें श्री मूलचन्दजी कताई स्वावलम्बनकी दिशामें संगठन कार्य कर रहे हैं। वहाँ किये गये कामका एक दिलचस्प विवरण उन्होंने भेजा है । मैं यहाँ उसका सारांश दे रहा हूँ ।

काम, मार्च १९२८ में शुरू किया गया था। पहले एक पाठशालाका प्रारम्भ किया गया; मन्शा इसके माध्यमसे सम्पर्कका प्रयत्न करना था । किन्तु फिर देखा कि सयानोंसे प्रत्यक्ष सम्पर्क करना जरूरी है। इसलिए किसानोंके खेतसे लौटने पर कार्यकर्त्ताओंने उनसे घर पर मिलना प्रारम्भ किया । चरखे उनके घरोंमें थे; मगर वे बेकाम पड़े हुए थे। पहले उनसे पिंजाई सीखने के लिए कहा गया। कुछ लोग सीखने लगे। यह काम रातको ९ और १०के बीचमें सिखाया जाता था । किन्तु पिंजारों में जिनका यह धन्धा ही था, इससे हलचल मच गई और उन्होंने भोले-भाले किसानोंमें तरह-तरह की बातें फैलानेकी कोशिश की। कार्यकर्त्तागण विचलित नहीं हुए । उन्होंने सारे किसानों की एक सभा बुलाई और उनके सामने जनकल्याणसे प्रेरित अपना उद्देश्य स्पष्ट किया। लोगोंको भरोसा हो गया और काम सुचारु रूपसे चलने लगा । फलस्वरूप विवरण प्रस्तुत करनेकी अवधि तक ५२८९ व्यक्तियोंकी आबादी- वाले ६१ गाँवोंके ९३३ कुटुम्बोंमेंसे ४१० कुटम्बोंने इस हलचल में भाग लिया है । इनमेंसे ६७ कुटुम्बोंने अपने ही काते हुए सूतसे अपने उपयोगके लायक साराका सारा कपड़ा बना लिया; अर्थात् ३४९ लोगोंने और ५९५ स्त्री-पुरुषोंने थोड़ा-बहुत कपड़ा तैयार किया। इस अवधि अर्थात् ८ महीनों में ९१५ व्यक्तियोंने धुनाई सीख ली । इस तरह कुल मिलाकर २,३९८ गज खादी तैयार हुई । यह खासी अच्छी प्रगति है और इससे जाहिर होता है कि धीरजके साथ काममें लगे रहनेसे लोगोंके साथ सम्बन्ध बनाये जा सकते हैं और उन्हें अपने कल्याणकी दिशामें दिलचस्पी लेनेको प्रेरित किया जा सकता है। रींगसके आसपासके गाँवोंमें जो कुछ हो सका वह बिला- शक कम-ज्यादा परिमाण में सारे देशमें सम्भव है ।

पश्चिममें सरोजिनी देवीका काम

श्री धनगोपाल मुखर्जी लिखते हैं: "

श्रीमती सरोजिनी नायडूकी अमेरिका यात्रासे अमेरिकावासी भारतीयोंके सौभाग्यका उदय हुआ और अमेरिकी जनताने बहुत अधिक लाभ उठाया है । उनकी इतनी बड़ी सफलताका कारण उनकी निडरता थी । खरी-खरी बातें सुनानेसे कोई नाराज हो जायेगा, इस बातकी उन्होंने कभी परवाह न की । साथ ही खुशामद द्वारा किसीको खुश करने की कोशिश भी उन्होंने नहीं की । यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि न्यूयार्ककी रूखे दिलवाली यान्त्रिक जनता उनकी भाषण-शक्ति पर लट्टू हो गई थी। अंग्रेजी भाषा पर उनका जो अधि-

१. अंशतः उद्धृत ।