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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/४४०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

सोमाभाई जैसे खेतीका काम सँभालता है और उसे शोभान्वित करता है उसी प्रकार वह अपने पर अंकुश भी रखता है; इसलिए खेतीका काम सुरक्षित है । पारनेर- कर उड़ता रहता है इसलिए गोशाला असुरक्षित है और विद्यार्थियोंके प्रति न्याय नहीं हो पाता ।

[ गुजरातीसे ]
बापुना पत्रो -श्री छगनलाल जोशीने

३०३. पत्र : जी० वी० मावलंकरको

६ सितम्बर, १९२९

भाईश्री मावलंकर,

आपसे क्या कहूँ । आपको तो बहुत काम रहता है और मुझ जैसे अनेक भिक्षुक आपके दरवाजेपर पड़े ही रहते हैं । किन्तु फीस देनेवाले भिखारियोंका हक पहला होता है या वह कोई बात नहीं है । यह तो हुई प्रस्तावना | आपके पास नवजीवन कार्यालयके न्यासके कागज पड़े हुए हैं । अब उसका पंजीयन हो ही जाना चाहिए। आसमानी सुलतानीकी किसे खबर है । कुछ हो जानेके पहले आपको, मुझे तथा अन्य सभी सम्बन्धित व्यक्तियोंको यह लांछन लगवा लेनेकी जोखिम उठानी ही पड़ेगी । इसलिए अब इसे एक सप्ताह में पूरा करवा दीजिए। दो वर्ष बीत गये हैं, इसलिए सम्भव हैं, कुछ परिवर्तन करने पड़ें। इस विषयमें सोच लीजिएगा ।

बापू

गुजराती (जी० एन० १२२६) की फोटो - नकलसे ।

३०४. पत्र : छगनलाल जोशीको

[ ७ सितम्बर, १९२९के पूर्व ]

चि० छगनलाल,

बहुत-से लोग बैठे हैं और बहुत-सा काम पड़ा है । इस बीच तुम्हें ये दो पंक्तियाँ लिख रहा हूँ ।

१. शर्मा वहाँ सोमवारको पहुँचेगा। मिल गया तो उसका तार इसके साथ भेज दूंगा । वह [ बिना रांधे ] अनाजका विशेषज्ञ है। उसने बहुत-सी पुस्तकें भी लिखी हैं। लक्ष्मीदास और बिना पकाया अनाज खानेवाले उससे बात कर लें। इसके बाद वह आगरा आना चाहे तो जरूर आ जाये । उससे कहना कि वह वहाँ ढाई मास

१. देखिए अगला शीर्षक ।