कोष बनानेके लिए दे दी जाय जिससे स्थायी किस्मके खर्चों और मौजूदा आमदनी और खर्च के बीचका अन्तर पूरा किया जाये और आगे भी जो रकम मिले वह इसी कामके लिए जामियाको दे दी जाये ।
खजांचीकी जानकारीके बिना इस तारीख से पहले मिली हुई सारी रकम खजांची के पास जमा करा दी जायेगी; और यह बैठक खजांचीको यह अधिकार देती है कि वह उस रकममेंसे जामियाके अधिकारियों द्वारा अध्यक्षकी मंजूरीसे किये गये खर्चको कानूनी खर्च मान ले । खजांची कोषके हिसाबकी जाँच-पड़ताल के लिए बाकायदा सर्टिफिकेटशुदा एक आडीटर (लेखा-परीक्षक) मुकर्रर कर सकेगा ।
अंग्रेजी (एस० एन० १५५८०) की माइक्रोफिल्मसे ।
३२३. पत्र : छगनलाल जोशीको
आगरा
११ सितम्बर, १९२९
जगजीवनदासको लिखे पत्रकी नकल इसके साथ भेज रहा हूँ । कल भोपालसे भेजी गई डाक मिल हुई होगी ।
प्रभावती कल यहाँ आ गई। शर्मा यहाँ पहुँच गया है । अच्छा ही हुआ । उससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है, ऐसा भी नहीं है । यहींसे अपने घर चले जानेके लिए कह दिया है। देवदास अलमोड़ा पहुँच गया है। जब-जब पत्र लिखो, भणसालीकी खबर देते रहना । गोपालराव अब स्वस्थ हो गया होगा । मन्दिरमें आ गया होगा ।
स्त्रियोंका उद्योगालय भणसालीके घरमें ले जानेका क्या हुआ, इसके बारेमें लिखना । डॉ० मेहताका अक्तूबर में आना अभी तक निश्चित है, ऐसा मुझे मणिलालसे मालूम हुआ है । इसलिए हमें अपना प्रबन्ध पहले ही कर लेना चाहिए। झवेरभाईकी पत्नीका क्या हुआ ?
बापूके आशीर्वाद
दुबारा नहीं देखा ।
गुजराती (जी० एन० ५४३२) की फोटो- नकल तथा बापुना पत्रो : श्री छगनलाल जोशीन से भी ।