और हमारी कल्पना ही होते हैं। यदि इस प्रकारके सन्देशोंकी सम्भावनाओंको मान लिया जाये तो मैं कहूँगा कि यह कार्य प्रेतात्माओं और माध्यम दोनोंके लिए हानि- कारक है। इस कारण बुलाई गई मृतात्मामें पुनः संसारके प्रति आकर्षण उत्पन्न होता है और इससे वे मोहमें बँधती हैं जब कि प्रयत्न यह होना चाहिए कि मृतात्माका संसारसे मोह छूट जाये और वह अधिक ऊँची उठे। यह जरूरी नहीं कि मृतात्मा अशरीरी होनेके कारण पहलेसे अधिक पवित्र हो जाती है । इस लोककी अपनी अधिकांश कमजोरियोंको मृतात्मा अपने साथ ले जाती है । अस्तु, उसके द्वारा दी गई सलाह या जानकारी सच्ची या प्रामाणिक हो यह जरूरी नहीं है । यह भी कोई खुशीकी बात नहीं है कि मृतात्मा इस लोकसे सम्पर्क पसन्द करती है। इसके विपरीत प्रयत्न यह होना चाहिए कि यह अनुचित मोह दूर हो जाये। क्योंकि इससे मृतात्माको भी हानि ही पहुँचती है ।
जहाँ तक माध्यमका सम्बन्ध है, यह बात मैं निश्चित जानकारीके आधार पर कह सकता हूँ कि उन सभी लोगोंका जिन्होंने ऐसे सन्देश प्राप्त किये या जिन्हें लगा कि वे सन्देश प्राप्त कर रहे हैं, जीवन रचनात्मक कामोंके लिए उपयोगी न रहा अथवा उनके मस्तिष्क कमजोर और विक्षिप्त हो गये। मुझे अपने ऐसे किसी मित्रका ध्यान नहीं आता जिसने इस प्रकार सन्देश प्राप्त किये हों और उसे इससे किसी प्रकारका लाभ हुआ हो ।
यंग इंडिया, १२-९-१९२९
३३१. सिन्धपर विपत्ति - एक अपील
सिन्धके लिए यह घोर विपत्तिका वर्ष है । . . सिन्ध सूखा इलाका है और यहाँ होनेवाली वर्षाका औसत मुश्किल से ५" है । इस वर्ष होनेवाली कुल वर्षा २५" से ५०" तक लेखी गई है और सो भी ३ सप्ताहसे कम समयमें ही । कोई भी जिला इस विनाशसे नहीं बचा है । सिन्धके मध्य भागको सबसे अधिक हानि पहुँची है।...
कुछ दिन पूर्व अटक नदीका चढ़ाव अपनी चरम सीमासे बढ़कर ७३" तक पहुँच गया ।... पंजाबकी नदियों में भी जबर्दस्त बाढ़ आई हुई है । ... सरकारने मुसीबत के समय काम करनेके लिए विशेष रेलोंका प्रबन्ध भी किया है।
जनता बाढ़ सहायता समिति, जिसने सन् १९२७की बाढ़के दौरान बहुत अच्छा काम किया था, पुनःसंगठित की गई है। इसके कार्यका आरम्भ गुजरात प्रादेशिक कांग्रेस कमेटी द्वारा उदारतापूर्वक दिये १०,००० रुपयोंसे आरम्भ हुआ था । समितिने अबतक सिन्धसे १५,००० रुपये एकत्र कर लिये हैं। लेकिन विपत्ति अकेली कब आती है । वर्षा, महामारी और फसल नष्ट करनेवाले
१. अंशतः उद्धृत ।