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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/४७५

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'३३७. भाषण : विद्यार्थियों के समक्ष, आगरामें'

[ १३ सितम्बर, १९२९]

गांधीजीने अपना भाषण शुरू करनेसे पहले विवाहित विद्यार्थियोंको हाथ खड़े करने को कहा । ८० फीसदी से भी ज्यादा हाथ ऊपर उठ गये । पहननेवालोंकी संख्या पूछने पर वह दस या बारहसे ज्यादा न निकली ।

इस तरह की निराशा और कमजोरीकी बातें किन्हीं युवकोंके मुंहमें शोभा दे सकती है' ? मैं अपने युवकोंके मुँहसे ऐसी अश्रद्धा और निराशाकी बातें सुननेको जरा भी तैयार न था । मेरे समान मौतके किनारे पहुँचा हुआ आदमी अपना भार हलका करनेके लिए अगर युवकोंसे आशा न रखें तो और किनसे रखे। ऐसे समय आगराके नौजवान मुझसे आकर कहते हैं कि वे मुझे अपने हृदय तो अर्पण करते हैं, मगर कुछ कर-घर नहीं सकते। मेरी समझमें नहीं आता, वे क्या कहते हैं ? " दरियामें आग लग जाये तो उसे कौन बुझा सकेगा ? " अगर आप अपने चारित्र्यको बलवान नहीं बना पाते तो आपका तमाम पठन-पाठन और शेक्सपियर, वर्डस्वर्थ वगैरा महा- काव्योंकी कृतियोंका अभ्यास निरर्थक ही ठहरेगा। जिस दिन आप अपने मालिक बन जायेंगे, विकारोंको अधीन रखने लगेंगे, उस दिन आपको बातोंमें भरी हुई अश्रद्धा और निराशाका अन्त होगा। आप एक ओर अपना हृदय अर्पित करनेकी बात करें और दूसरी ओर कर्मठ होने में असमर्थता दिखायें तो क्या होगा । हृदय देना तो सब कुछ दे देना है। हृदय देनेके लिए पहले पास में हृदय होना चाहिए। और यह तो तभी हो सकता है जब आप आत्मविकास करेंगे ।

किन्तु इसकी जगह हम आज देखते क्या हैं ? आज संयुक्त प्रान्त में विद्यार्थी विवाह कर लेता है; सो भी सुनता हूँ अभिभावकोंके दबावमें आकर नहीं, स्वयं अपनी ही जिद और इच्छासे । विद्यार्थी जीवनमें आप लोगोंसे शक्तिके अपव्ययकी नहीं संचयकी अपेक्षा की जाती है । देखता हूँ आप लोगों से पचास फीसदी से भी अधिक विवाहित हैं। यदि आप इस दुरवस्थाको सुधारना चाहते हैं तो विवाहित रहते हुए भी आप लोगोंको अपनी वासनाओंको कठोर संयममें रखना चाहिए और विशुद्ध ब्रह्म- चर्यका पालन करते हुए विद्यार्जन करना चाहिए। आप देखेंगे कि इस संयमके कारण आप शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टिसे निखर कर निकले हैं। मैं जो कुछ

१. यह भाषण आगरा कॉलेजके नेस्टन हालमें आगरा कॉलेज एवं सेट जॉन्स कालेज के विद्यार्थियों के समक्ष दिया था। यह "संयुक्त प्रान्तको यात्रा” शीर्षकके अन्तर्गत प्रकाशित हुआ था।

२. लीडर, १६-९-१९२९ से ।

३. कालेजके विद्यार्थियोंने गांधीजीको दिये मानपत्र में कहा था : "हम गरीब हैं, अतएव केवल हमारे हृदय हो हम आपको अर्पण करते हैं। हमें आपके आदर्शोंमें विश्वास है, परन्तु उनके अनुसार आचरण

करनेमें हम असमर्थ है" ।