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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/५०

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१४. एकत्र विवरण

आन्ध्र में जमा किये गये चन्देका एकत्र विवरण[] नीचे प्रकाशित किया जा रहा है। मैंने इसका वचन दिया था। इसे श्री नारायणमूर्तिने अ॰ भा॰ चरखा संघके लेखापरीक्षककी हैसियत से तैयार किया है और देशभक्त कोंडा वेंकटप्पैयाने इसकी जाँच की है।

पिछले आठ वर्षों में मुझे अपने दौरोंके प्रबन्ध और उनपर होनेवाले खर्चकी जाँच तथा देखभालका न तो अवसर मिला और न मैंने इसकी इच्छा ही व्यक्त की थी। आन्ध्रके इस कार्यक्रमोंसे भरपूर दौरेके खर्च आदिके बारेमें मैं पहली बार यह कर रहा हूँ। इसके पहले भी खर्चके मामले में बहुत अधिक ढिलाई और सामान इत्यादि खरीदने में मैंने बड़े खुले हाथों खर्च करनेकी प्रवृत्ति देखी थी। ज्यादातर इस शाही खर्चका कारण था तो मेरे प्रति लोगोंका वैयक्तिक स्नेह ही; पर जब खर्चकी रकम दरिद्रनारायणके नामपर इकट्ठे किये कोष में से काटी गई तो यह स्नेह खटकने लगा और इसलिए मैंने आन्ध्रप्रदेशकी यात्राके दौरान, जहाँ तक सम्भव हुआ, प्रबन्ध-व्यवस्था अपने ही हाथ रखी और इस बातपर जोर दिया कि माल मँगानेके बीजक पेश करके उनके खर्चकी मुझसे मंजूरी लिए बिना एकत्र कोष से कोई कटौती न की जाये। मैंने इस बातपर भी जोर दिया कि अपने दलके लोगोंका रेल खर्च भी मैं स्वयं वहन करूँगा ताकि इस खर्चसे संचित कोषमें कमी न पड़े। मैंने इस बातपर भी जोर दिया था कि जहाँ स्थानीय मेजबान द्वारा खाने-पीनेकी व्यवस्था न हो, अपने साथियोंके भोजनका खर्च भी मैं ही दूँगा। अतः प्रमाणित खर्चेमें आम तौरपर केवल मोटर-किराया, पेट्रोल, स्वयंसेवकोंका रेल किराया, अथवा ऐसी ही अन्य मदें शामिल हो सकती थीं। इस प्रकारका खर्च एकत्रित धन राशिके ५ प्रतिशत से अधिक नहीं बैठता। ३१९ गाँवों में एक बड़ी जागृति पैदा करनेके लिए इतना खर्च अधिक नहीं है। खर्चके पक्ष में इतना कहनेके बाद भी मुझे यह तो स्वीकार करना ही होगा कि एकत्रित धन राशियाँ बहुत बड़ी ही क्यों न हों, पर एकसे दूसरे स्थानपर तेजीसे दौड़ते फिरना और इसके लिए मोटरोंका ऊँचा-ऊँचा किराया भरते जाना हमारी आर्थिक सामर्थ्य से बाहरकी बात है। दौरेपर रहते हुए, मैंने एक बिलका[] पूरा ब्यौरा प्रकाशित किया था। अगर पाठक मेरे द्वारा प्रकाशित खर्चके इस विवरणका पूरा-पूरा महत्व समझते हैं, तो उन्हें उक्त बिलका ध्यान आ गया होगा। उसमें भी सुधार या बचतकी काफी गुंजाइश थी। चूँकि अपने सभी दौरोंमें से, जिनका मुझे स्मरण है, यह दौरा सबसे अधिक मितव्ययितापूर्ण रहा है इसलिए इसका ऐसा उल्लेख करना अशोभनीय लग सकता है। आसानीसे सन्तुष्ट हो जाना या आदर्श परिस्थिति

 
  1. १. यहाँ नहीं दिया जा रहा है।
  2. २. देखिए खण्ड ४०, पृष्ठ ३३१-३२।