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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/५४३

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भाषण : काशी में

मिलेगा। परन्तु जनवरीमें तो आप लोगोंको इतना भी नहीं मिलेगा। महात्माजी ने आनेवाले अवसर के लिए पूरी तैयारी करनेकी जोरदार अपील की ताकि लोगोंको आनेवाली घटनाका आभास कुछ समय पूर्व ही उस तरह मिल जाये जैसे दिन निकलने से पहले उबाकी लालिमासे सूर्योदय होने का आभास मिल जाता है। अगर विद्यार्थी इन तीन महीनोंमें पूरी तैयारी नहीं कर लेते हैं तो कुछ भी प्राप्त नहीं हो सकेगा। आजादी तो हृदयकी शुद्धिके बादकी कुरबानीसे ही प्राप्त हो सकती है। हृदय शुद्ध किये बिना स्वराज्य पाना सम्भव नहीं है। यह पहली जरूरत है। इसके बाद ही कांग्रेस के सिद्धान्तों पर अमलकी बात आयेगी।

[ अंग्रेजीसे ]
लीडर, २७-९-१९२९
 

४१४. भाषण : काशी में

बुधवार, २५ सितम्बर, १९२९

महात्मा गांधीने अपने भाषण में अछूतों से कहा :

आप धैर्य धारण करें। यद्यपि अछूतोंके लिए बहुत-कुछ कार्य किया गया है। किन्तु अबतक यह सन्तोषजनक नहीं हो पाया है। यदि किसी धर्मके प्रति मनमें घृणा उत्पन्न हो जाये तो उसे छोड़ देना चाहिए। जहाँतक मैं देखता हूँ, अस्पृश्यता हिन्दू धर्म में नहीं है; बल्कि स्पृश्यता ही हिन्दू धर्मकी जड़ है। जिस प्रकार वस्त्र खराब होनेसे छोड़ दिया जाता है और अच्छा वस्त्र पहना जाता है उसी प्रकार हिन्दू धर्म भी तभी छोड़ा जा सकता है जब कोई उससे अच्छा धर्म मिले।

अगर कोई मुझे चमार या भंगी कहे, तो मुझे अच्छा लगता है, क्योंकि ये नाम पेशोंके कारण पड़े हैं और चमार या भंगीका पेशा खराब नहीं है। डाक्टर भी वही करता है। दोनोंके कार्य में अन्तर नहीं है; पर उसे कोई खराब नहीं कहता। डाक्टर तो अपने कार्यके बदले बहुत पैसे ले लेते हैं, और आप गुजारे-भरके लिए लेते हैं। धर्ममें खराबियाँ जरूर आ गई हैं। हम ईश्वरसे प्रार्थना करें कि जो आप लोगोंको कष्ट दे रहे हैं उनका हृदय शुद्ध हो जाये।

मुर्दार मांस कुछ अस्पृश्य जातियोंको छोड़कर दूसरे लोग नहीं खाते। अछूतोद्धार मण्डलको धन्यवाद है कि उसने इस गन्दी आदतको छुड़ानेका प्रयत्न किया और आप लोगोंको भी धन्यवाद है कि आपने इसे छोड़ दिया। किन्तु शराब पीना भी उतना ही बुरा है। आप कहेंगे कि डाक्टर और अफसर लोग भी पीते हैं। किन्तु समर्थको दोष नहीं दिया जाता। आप लोग उनका मुकाबला न करें। यदि कोई कुछ बुरा काम करता है तो उसकी नकल नहीं करनी चाहिए। यों तो मालवीयजी महाराज लोगों को शुद्ध कर देते हैं, यह अच्छा है; किन्तु असली शुद्धि तो आपके अपने प्रयत्नसे होनी चाहिए। आप लोगों में जागृति हो रही है। उसका आप दुरुपयोग न करें। जो बुरा है उसे कभी ग्रहण न करें। दूसरोंके प्रति घृणा आदि भाव कभी न आने