४४०. भेंट : 'फ्री प्रेस ऑफ इंडिया' के प्रतिनिधि से
२९ सितम्बर, १९२९
महात्मा गांधीने 'फ्री प्रेस ऑफ इंडिया' के प्रतिनिधिसे विशेष भेंटमें अ० भा० कां० कमेटीकी लखनऊमें हुई बैठकके सम्बन्धमें अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा:
अ० भा० कां० कमेटीकी बैठककी कार्यवाही बहुत शान्तिपूर्वक चली और लाहौर कांग्रेसका सभापतित्व अस्वीकार करनेसे सम्बन्धित मेरे स्पष्टीकरणके बाद बैठकमें किसी प्रकारकी अनावश्यक उत्तेजनाका प्रदर्शन नहीं किया गया। कलकी कार्यवाहीसे अ० मा० कां० कमेटीकी बुद्धिमत्ताका परिचय मिला।
यह पूछे जाने पर कि देशको आगे बढ़ाने के लिए लाहौर कांग्रेसमें क्या कार्यक्रम बनाया जायेगा, महात्माजी ने कहा :
लाहौर कांग्रेस क्या कुछ करेगी सो तो मैं नहीं कह सकता।
- [अंग्रेजीसे]
- हिन्दुस्तान टाइम्स, २-१०-१९२९
४४१. पत्र : आश्रमकी बहनोंको
लखनऊ
मौनवार, ३० सितम्बर, १९२९
लखनऊ तो परदा प्रथाका केन्द्र माना जाता है। यहाँ मुसलमान बहनें बहुत रहती हैं। उन्होंने मुझसे पूछा कि उनका दुःख कैसे मिटे? मैं तो एक ही जवाब दे सकता हूँ न? हम खुद ही अपने बन्धन गढ़ते हैं। कल ही इन बहनोंकी सभा थी। उन्हें वहाँ परदेमें रहनेके लिए किसीने मजबूर नहीं किया था; मगर उन्होंने खुद ही मान लिया था कि परदेके बिना चल ही नहीं सकता। ऐसी अड़चनें दूर करनेके लिए आश्रम है और उसकी डोर तुम्हारे हाथमें है यदि तुम बन्धन तोड़कर, मर्यादा-धर्मका पालन करके, ज्ञान लेकर, सेवा-परायण बन जाओ तो दूसरी बहनोंके लिए सहजमें ही उदाहरण बन जाओगी।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (जी० एन० ३७०३) की फोटो-नकलसे।