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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/५७४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

बड़ी गंगाबहन शान्त हो गई है क्या? यशोदादेवीका क्या हुआ?

कृष्णमैया देवीके बारे में पता लगाना। छुट्टी देनी पड़े तो दे देना। महावीरसे चुपचाप पूछा जा सके तो पूछना कि ये सब लोग बार-बार बीमार क्यों पड़ते रहते हैं।

बापूके आशीर्वाद

[गुजरातीसे]
बापुना पत्रो -- ७ : श्री छगनलाल जोशीने
 

४४६. पत्र : फूलचन्द शाहको

फैजाबाद
१ अक्टूबर, १९२९

भाईश्री ५ फूलचन्द,

तुम्हारा पत्र मिला। वनठलीके मेघवाल भाई मकान बनाना चाहते हैं, किन्तु वे इसके लिए भी रियासतसे पैसा प्राप्त क्यों नहीं करते? क्या किसीने रियासतको अर्जी दी थी? यदि उन्हें मदद देनी ही पड़े तो अन्त्यज-समिति मदद क्यों नहीं देती? दूसरी रीति से मदद देना आवश्यक लगे तो भी इसपर तो विचार किया ही जाना चाहिए कि हम जामनगर जैसी रियासत में खर्च करें या नहीं। यदि इसमें कोई आपत्ति न जान पड़े तो समिति रियासतको बाकायदा एक पत्र लिखकर देखे कि रियासत उनके लिए मकान क्यों नहीं बनाती।

यदि बढ़वानकी अन्त्यज-शाला के लिए उसकी अपनी जमीन आवश्यक हो तो समितिको उसका विचार भी कर लेना चाहिए।

इस विषय में जहाँ मेरी सहायताकी खास जरूरत जान पड़े वह भी समितिके मारफत लेना कदाचित अधिक योग्य होगा।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (सी० डब्ल्यू० २८५८) की नकल से।
सौजन्य : फूलचन्द शाह