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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/५७५

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४४७. पत्र : शिवाभाईको

फैजाबाद
१ अक्टूबर, १९२९

भाई शिवाभाई,

मैंने तुम्हारा पत्र पढ़ लिया है। मुझे इतनी जानकारी नहीं है कि मैं स्वतन्त्र रूपसे उसकी परीक्षा कर सकूँ। मोटे तौर पर तो तुम्हारा तर्क ठीक जान पड़ता है। किन्तु तुम्हें इस विषय में अप्पा साहब और जेठालालके साथ पत्र-व्यवहार करना चाहिए। मैं तुम्हारा पत्र अप्पा साहबको तो भेजे ही दे रहा हूँ।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (एस० एन० ९४९३) की फोटो-नकलसे।

 

४४८. पत्र : मथुरादास पुरुषोत्तमको

फैजाबाद
१ अक्टूबर, १९२९

चि० मथुरादास

तुम्हारा पत्र मिला। तुमने चरखा-वर्गका काम हाथमें लिया, यह अच्छा हुआ। इसे परिपूर्णता तक पहुँचाया जा सके तो पहुँचाना। इसके लिए तुम्हें अपनी तबीयत दुरुस्त कर लेनी चाहिए। उतना ही श्रम करना जितना शरीर सहन कर सके। दूध, गेहूँ और सब्जियोंसे बनी हुई चीजें अधिक लिया करो। गेहूँसे बनी चीजें और सब्जियाँ मुख्य खुराक होनी चाहिए। यदि पचा सको तो कुछ ताजी और कच्ची सब्जी भी लेनी चाहिए। बच्चे काम में लगते जा रहे हैं, यह अच्छा हुआ है। मोतीबहनका ज्वर बिलकुल चला गया होगा।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी० एन० ३७३२) की फोटो-नकलसे।