सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/५८५

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
५४७
टिप्पणियाँ

वैसे भी, टिप्पणीमें लगाये नये अभियोगों पर राज्यके अधिकारियोंकी राय ले लेने एवं उनकी बात सुन लेनेके पहले ही उसे प्रकाशित कर देना मैं उचित नहीं समझता। लेकिन चूॅंकि मैं नपे-तुले शब्दों में प्रशंसाके दो शब्द कह गया हूँ और देशी राज्योंके सम्बन्ध में अपना विश्वास प्रकट कर चुका हूँ, पूरे-पूरे विश्वासके साथ उक्त टिप्पणी मैंने नवाबके पास भेज दी है; मुझे आशा है, वह उसे ध्यान से पढ़ेंगे और उदारतापूर्वक उसपर विचार भी करेंगे।

नागरी प्रचारिणी सभा

नागरी प्रचारिणी सभा, (काशी) के मन्त्रीजी ने नीचे लिखी विज्ञप्ति प्रकाशनार्थ भेजी है :

काशीकी भारतीय कला-परिषद् ने अपने चित्रों, मूर्तियों और अन्य ऐतिहासिक तथा साहित्यिक वस्तुओंका समूचा संग्रह नागरी प्रचारिणी सभाको सौंप दिया है। इस बहुमूल्य संग्रहकी कीमत एक लाख रुपयेसे भी ज्यादा बताई जाती है। इस वस्तु संग्रहालयको सजाकर रखनेके लिए सभाने अपने भवनकी दूसरी मंजिलका सारा हिस्सा, जो २५,०००) की लागतसे बना था, दे दिया है। सभा अपने सदस्यों और दूसरे सज्जनोंसे, जो इस काममें दिलचस्पी रखते हैं, प्रार्थना करती है कि वे उक्त संग्रहालयके लिए कलापूर्ण या ऐतिहासिक वस्तुएँ देकर या दिलाकर सभाकी सहायता करें। जो सज्जन अपनी चीज किन्हीं शर्तों पर भेजना चाहें, वे खुशीसे वैसा कर सकते हैं। ऐसी शर्तोंका यथोचित पालन किया जायेगा। आशा है, कला, भूगर्भ विज्ञान, साहित्य और इतिहास आदिसे प्रेम रखनेवाले सज्जन इस काममें हमारी सहायता करेंगे।

इस विज्ञप्तिके मिलनेसे पहले ही मैं उस विशाल भवनको देख आया था, जिसमें संग्रहालय स्थायी रूपसे रहेगा। मैंने संग्रहालय में रखी हुई वस्तुएँ भी देखी हैं और वे दर्शनीय हैं। आशा है, सभाकी अपीलके उत्तर में कलाप्रेमी जनताकी ओरसे सभाको समुचित एवं उदार आश्रय मिलेगा।

[ अंग्रेजीसे ]
यंग इंडिया, ३-१०-१९२९