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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/६१८

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४९६. पत्र : के० ए० फिटरको '

मुकाम बस्ती
८ अक्टूबर, १९२९

प्रिय मित्र,

आपके पत्रके लिए धन्यवाद । जिन किताबोंका' आपने उल्लेख किया है वे आश्रम में आ गई हैं । नवम्बरके अन्ततक मेरे आश्रम पहुँचनेकी कोई सम्भावना नहीं है । इसलिए मैं निश्चित रूपसे नहीं कह सकता कि मुझे इन पुस्तकोंको देखनेका अवसर कब मिल सकेगा । मैं यह भी बता दूं कि हम 'नवजीवन' में पुस्तकोंकी समीक्षा नहीं देते ।

हृदयसे आपका,

श्री के० ए० फिटर

मन्त्री, ईरान लीग

हार्नबी रोड, कोर्ट, बम्बई


अंग्रेजी (एस० एन० १५२४६) की माइक्रोफिल्मसे ।

४९७. पत्र : आसासिंहको '

मुकाम बस्ती
८ अक्टूबर, १९२९

प्रिय मित्र,

अगर आप अपने आविष्कारको चरखा-संघ के मन्त्रीके पास देखने के लिए भेजें तो उसे गुप्त रखनेका ऐसा प्रबन्ध कर दिया जायेगा कि कोई उसकी नकल न कर सकें। आप चाहें तो अपनी खोजपर किसीको दिखाये बिना ही एकस्व अधिकार

१. के० ए० फिटरके पत्र (एस० एन० १५२४५), २३-९-१९२९ के उत्तर में ।

२. एफ० के० दादाचानजी द्वारा लिखी " अवेस्ता जवाहिरो " पुस्तक-माला । इन पुस्तकोंमें धर्म- सम्बन्धो तुलनात्मक विवेचन दिया है। पुस्तकोंमें जरथुश्त और अन्य धर्मोकी नई व्याख्या की गई है। पत्र- प्राप्तकर्त्ताने पुस्तकोंकी नवजीवनमें समीक्षाका अनुरोध किया था। "

३. आसासिंह के पत्र दिनांक २४ सितम्बर, १९२९ के उत्तरमें। पत्रमें लिखा था : “ चरखे के सम्बन्धमें प्रकाशित आपके विज्ञापनके उत्तर में जिसमें आपने ऐसे चर्खेकी माँग भी की है जिसपर प्रतिदिन आठ घंटेमें १६,००० गज सूत काता जा सके, मैंने एक ऐसे चर्खेका नमूना तैयार किया है जो आपकी आवश्यकताओंको लगभग पूरा करता है। इस चर्खेपर आप प्रचलित चरखेके मुकाबिलेमें जिसपर मुझे पता लगा है कि २५०० से ३००० गज सूत आठ घंटेमें काता जा सकता है, छः गुना अधिक सूत कात सकते हैं। क्या आप मुझे वह तरीका बतायेंगे जिससे मैं अपनी इस खोजको चरखा संघको भेजते समय गुप्त रख सकूँ। मुझे भय है कि अगर मैं इसे एकस्व अधिकारके लिए प्रार्थनापत्रके साथ दूँ तो कोई इसकी नकल कर लेगा । " (एस० एन० १५३५६ ) ।