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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/६३३

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५११. पत्र: छगनलाल जोशीको

बाराबंकी,
११ अक्टूबर, १९२९

चि॰ छगनलाल,

गोंडासे हम अब बाराबंकी आ गये हैं। नहा-धोकर सभा आदि हो जानेके बाद फिर रवाना हो जायेंगे। इसलिए आज तो इतना ही लिखकर समाप्त करता हूँ। रातको हरदोईमें रहेंगे। डाक वहाँ मँगाई है, ऐसा प्यारेलाल कह रहा है।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी॰ एन॰ ५४५५) की फोटो-नकलसे।

५१२. भाषण: राजनैतिक सम्मेलन, हरदोईमें

११ अक्टूबर, १९२९

अपने भाषणमें महात्माजी ने कहा:

हमें आदत हो गई है कि हम प्रस्ताव तो पास कर डालते हैं मगर उनपर अमल नहीं करते। मैं चाहता हूँ कि यह आदत छोड़ दी जाये। हमारी उन्नतिकी राहमें यह मुख्य रुकावट है। अगर हमने सन् १९२१ में किये अपने वायदे निभाये होते तो स्वराज्य कभीका मिल गया होता। हमारी परीक्षाका एक मौका और आनेवाला है और इस प्रदेशके लोगों पर तो विशेष जिम्मेदारी है, क्योंकि आपके प्रदेशसे अगली कांग्रेसके लिए राष्ट्रपति चुना गया है। नौजवानों पर और भी अधिक जिम्मेदारी है। पण्डित जवाहरलाल आपके प्रदेशके हैं। इसके साथ-साथ वे नौजवान भी हैं। अगर आप अपनी और उनकी इज्जत बनाये रखना चाहते हैं, तो जो कुछ आप कहते हैं उसपर अमल करें। आपने छुआछूत विरोधी प्रस्ताव पास किया है। मैं आशा करता हूँ कि आप इसी प्रकार हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं विदेशी वस्त्रोंके बहिष्कारके प्रस्ताव भी पास करेंगे। विदेशी वस्त्रका बहिष्कार खद्दरके उपयोग द्वारा ही सम्भव है। अगर आप इन प्रस्तावोंको पास करें तो इनपर अमल भी कीजिए। मैं आशा करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि आप हमारे सामने आनेवाले बड़े संघर्षके लिए तैयार हों।

[अंग्रेजीसे]
बॉम्बे क्रॉनिकल, १४-१०-१९२९