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५१८. पत्र: इलीनौर एम॰ हाॅगको[१]
मुकाम हरदोई
१२ अक्टूबर, १९२९
प्रिय बहन,
आपका पत्र मिला। जिस परिचय-पत्रकी आपने माँग की है, उसे लिख भेजनेमें मैं असमर्थ हूँ। कृपया क्षमा करें।
हृदयसे आपका,
कु॰ इलीनौर एम॰ हाॅग
२११५, एफ स्ट्रीट, एन॰ डब्ल्यू॰,
वाशिंगटन, डी॰ सी॰
संयुक्त राज्य अमेरिका
२११५, एफ स्ट्रीट, एन॰ डब्ल्यू॰,
वाशिंगटन, डी॰ सी॰
संयुक्त राज्य अमेरिका
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५६६१) की फोटो-नकलसे।
५१९. पत्र: हेनरी एस॰ सॉल्टको[२]
मुकाम हरदोई
१२ अक्टूबर, १९२९
प्रिय मित्र,
आपका पत्र पाकर मुझे आश्चर्य और प्रसन्नता हुई। बेशक, आपकी किताब ही शाकाहार पर लिखी गई अंग्रेजीकी पहली किताब[३] थी जो मेरे देखनेमें आई थी और उससे शाकाहारमें मेरी श्रद्धाको अडिग बनानेमें जबरदस्त मदद मिली थी। जहाँ-
- ↑ इलीनौर एम॰ होंग के पत्र (एस॰ एन॰ १५६६०), ३०-८-१९२९ के उत्तरमें। पत्रमें कुमारी हॉगने भारतमें अपने प्रस्तावित अध्ययनका गांधीजी से समर्थन चाहा था। अध्ययनका विषय था: "सहकारिता आन्दोलनका भारतीय राष्ट्रीय भावनासे सम्बन्ध।" यह विषय जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालयमें उनके शोध-प्रबन्धका था। गांधीजी की सिफारिशपर वे प्रस्तावित अध्ययन कार्यके लिए गंगेनहम् मैमोरियल फाउंडेशनसे एक वर्षके लिए छात्रवृति चाहती थीं।
- ↑ हेनरी एस॰ सॉल्टके पत्र (एस॰ एन॰ १५६६२), १८-९-१९२९ के उत्तर में।
- ↑ सॉल्टने गांधीजीकी आत्मकथामें अपनी पुस्तक ए प्ला फॉर वैजीटेरियनिज्म का उल्लेख किया था। इन्हीं सज्जनने लगभग ४० वर्ष पूर्व थोरोकी जीवनी प्रकाशित कराई थी और वे अब इस सामग्रीको अपने अमेरिकी मित्र रेमंड ऐडम्सको, जो थोरोका पूरा जीवन चरित्र लिखना चाहते थे, सौंप देना चाहते थे। सॉल्ट यह जानना चाहते थे कि गांधीजी ने थोरोके बारेमें क्या-कुछ पढ़ा है और उसका उनपर क्या प्रभाव हुआ है। क्योंकि उनके विचारमें थोरो और गांधीजी के विचारोंमें बहुत कुछ ऐक्य था।