३०. पत्र : माधवजी ठक्करको
१० जून, १९२९
तुम्हारा पत्र मिल गया है। जुलाई मास में तुम अवश्य आ जाओ। जुलाई पहले सप्ताह में तो मैं यहाँ लौटकर आ ही जाऊँगा[१]।
मोहनदासके वन्देमातरम्
गुजराती (जी॰ एन॰ ६७८७) की फोटो नकलसे।
३१. पत्र : फूलचन्द कस्तूरचंद शाहको
[११ जून, १९२९][२]
जूनागढ़में अन्त्यजोंके लिए कुआँ खुदवानेका काम कितने वर्षोंसे अधूरा पड़ा है। देवचन्दभाईको मालूम है। वे कुछ प्रबन्ध भी कर रहे थे। मालूम करना। तुम्हारे दलको कुआँ पूरा करना ही चाहिए। देवचन्दभाईको खर्च भेज देनेके लिए तो लिख ही चुका हूँ।
मणिलाल कोठारीको तुमने युवक परिषद् में नहीं लिया? उसे तो लेना चाहिए। रंगूनसे ७५० रुपये आये हैं। इनके विषयमें भी उसने कहा था। इस रुपयेका क्या उपयोग करें इसका निर्णय भाई नानालालसे पूछकर करना ठीक होगा। उसे तुम दोनोंके हस्ताक्षर सहित पत्र भेजा जाना चाहिए।
बापूके आशीर्वाद
केलवणी मंडल, वढवान सिटी,
काठियावाड़
गुजराती (जी॰ एन॰ ९१८९) की फोटो-नकलसे।